जशपुर में इन गांवों के आदिवासियों का ऐलान, अब यहां हमारी सरकार
Jashpur News in Hindi

पत्थलगढ़ी में लिखे शब्दों से सरकार के कान खड़े हो गए हैं और इसे सरकार अलगाववादी विचारधारा की सुगबुगाहट के तौर पर देख रही है.

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भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले का नाम हटा दिया है. जशपुर का नाम नक्सल प्रभावित जिले से हटाने के बाद यहां आदिवासियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आदिवासियों ने अपने हक की आवाज बुलंद करने का दावा करते हुए पत्थलगढ़ी की प्रथा शुरू कर दी है.

पत्थलगढ़ी में लिखे शब्दों से सरकार के कान खड़े हो गए हैं और इसे सरकार अलगाववादियों या कह सकते हैं नक्सल विचारधारा की सुगबुगाहट के तौर पर देख रही है. बीते रविवार को जशपुर में आदिवासियों के आयोजन में सरकार का एक भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था. इससे चर्चा है कि सरकार ने या तो आदिवासियों को फ्री हैंड कर दिया या फिर इसे रणनीति के तहत अनदेखा किया है.

22 अप्रैल को सुबह 10 बजे से बगीचा विकासखण्ड के बछरांव में तीन गांव के हजारों आदिवासियों ने सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले पत्थलगढ़ी स्थापित किया.
सिहारडांड, बुटंगा, बछरांव इन तीन गांवों में संविधान की बातों को लिखते हुए जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पूर्ण अधिकार नहीं मिलने की बात ग्रामीण आदिवासी कह रहे हैं.



आदिवासियों का कहना है कि हमें पांचवी अनुसूची का लाभ नहीं दिया जा रहा है. पथलगढ़ी लगाकर ये गांव आदिवासी ग्रामसभा की सरकार से शासित होंगे. मतलब साफ है कि ये गांव अब गैर आदिवासियों और सरकार के हस्तक्षेप से खुद को मुक्त करने की घोषणा कर चुके हैं.
जशपुर में आयोजित आदिवासियों की इस रैली और आमसभा के दौरान पुलिस के एक भी जवान मौके पर नहीं थे.
न ही स्थानीय प्रशासन का कोई नुमाइंदा उपस्थित था. इन गांवों में आदिवासी समाज पत्थलगढ़ी तैयार करने में जुट गया है. बछरांव में तो बकायदा प्रशासन के मना करने के बावजूद युवकों ने पत्थलगढ़ी तैयार कर दिया है.

आदिवासी नेता जोसेफ जिग्गा और कुंदन पन्ना की मानें तो आदिवासियों की माने तो ये बाबा अम्बेडकर के दिये संवैधानिक अधिकारों की बात लिखकर गैर आदिवासियों को बताना चाहते हैं कि यह इलाका आदिवासियों का है और रूढ़ी प्रथा के अनुसार ग्राम पंचायत के अलावा आदिवासियों की ग्रामसभा से ही सारा शासन किया जाएगा.

ये भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244, अनुच्छेद 19 के अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को आधार बनाकर ग्राम सरकार की स्थापना करना चाहते हैं. इनके द्वारा पत्थलगढ़ी में लिखा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में केंद्र सरकार या राज्य सरकार की एक इंच जमीन नहीं है. गैर आदिवासी हों या सरकार के अधिकारी आदिवासी गांवों में बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई भी काम नहीं किया जाएगा.
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