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आज भी साक्षर नहीं है राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवाओं का ये गांव!

Deepak Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: December 8, 2018, 3:17 PM IST

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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र और विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवाओं के पीछे पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है लेकिन जशपुर में पहाड़ी कोरवा आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है।हम आपको आज जशपुर के पहाड़ी कोरवाओं के हालात से रूबरू कराने जा रहे है. मामला है जशपुर के पंडरापाठ का आश्रित गांव आम्बापकरी का. इस गांव में लगभग 20 परिवार के सैकड़ों पहाड़ी कोरवा निवासरत है. ये पुरा का पूरा गांव भी साक्षर है.

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जशपुर के आम्बापकरी गांव के किसी भी पहाड़ी कोरवा ने आज तक स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, क्योंकि इस गांव के आसपास कोई स्कूल और आंगनबाड़ी तक नहीं है. यहां से 6 किलोमीटर दूर तेंदपाठ में स्कूल और आंगनबाड़ी हैं लेकिन इतनी दूर छोटे बच्चों को जंगली रास्ते को पार कर स्कूल और आंगनबाड़ी जा पाना मुश्किल है,इसलिए इस गांव का कोई भी पहाड़ी कोरवा पढ़ नहीं पाया.

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आम्बापकरी गांव में शिक्षा के अलावा बिजली,सड़क,पानी और आवास की सुविधा भी नदारद है. इस गाँव में पहुंचने के लिए एक सड़क तक नहीं है. यहां पहुंचने के लिए पगडंडियों और जंगली रास्तों को पार करना पड़ता है. शासन द्वारा मिल रहे 35 किलो चावल को भी ये  पहाड़ी कोरवा 7 किलोमीटर पीठ में लादकर घर लाते है. बात पेयजल की करे तो सालों पहले एक हैण्डपम्प खोदा गया था जो पिछले कई सालों से खराब पड़ा हुआ है. यहां की महिलाएं 6 किलोमीटर का सफर तय कर पानी लेकर आती है, जिससे इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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आम्बापकरी गांव के ग्रामीण का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी इन्हे नहीं मिल पा रहा है. गौरतलब हो कि इस क्षेत्र में फिलहाल रात को पारा 4 डिग्री तक पहुंच रहा है और ठंड से बचने के लिए कई ग्रामीण झोंपड़ी बनाकर उसमे आग जलाकर रह रहे है. इस गांव में सिर्फ दो ग्रामीणों को ही आवास योजना का लाभ मिल पाया है. इस मामले में अधिकारी जल्द ही गांव में सुविधाएं पहुंचाने की बात कह रहे है.(ये भी पढ़ें: MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में किसकी बनेगी सरकार और कौन होगा सीएम?)

बता दें कि ये वही पहाड़ी कोरवा है जिनके विकास के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए फूंक दिए जाते है. ये वही पहाड़ी कोरवा है जिनके नाम पर अब तक अरबों रुपए खर्च कर दिए गए है, ये वही पहाड़ी कोरवा हैं जिनके नाम पर जिले की सियासत चलती है, ये वही पहाड़ी कोरवा है जिनके नाम पर सफेदपोश अपनी राजनीति चमका रहे है, ये वहीं पहाड़ी कोरवा हैं जिनको राजनीतिक दल और राजनेता अपना वोट बैंक मानकर सत्ता पर राज करते है, लेकिन अभी तक किसी की नजर इन पहाड़ी कोरवाओं की बदहाली पर क्यों नहीं गई. क्या सिर्फ और सिर्फ चुनावों के वक्त ही सबको इन पहाड़ी कोरवाओं की याद आती है.

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First published: December 8, 2018, 12:21 PM IST
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