इस प्राचीन तरीके से ग्रामीण पानी के स्रोत का लगाते हैं पता !
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इस प्राचीन तरीके से ग्रामीण पानी के स्रोत का लगाते हैं पता !
इस प्राचीन तरीके से ग्रामीण पानी के स्रोत का लगाते हैं पता !

जशपुर जिले में कुआं और बोर खुदवाने से पहले जमीन के अंदर पानी की उपलब्धता का पता बांस के सहारे प्राचीनतम तरीके से लगाया जाता है. इस दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि जहां पर खुदाई की जाएगी वहां पर्याप्त मात्रा में पानी है या नहीं.

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कुआं और बोर खुदवाने से पहले जमीन के अंदर पानी की उपलब्धता का पता बांस के सहारे प्राचीनतम तरीके से लगाया जाता है. इस दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि जहां पर खुदाई की जाएगी वहां पर्याप्त मात्रा में पानी है या नहीं.

मामले में ग्रामीण सुनील पैकरा ने बताया कि बांस के सहारे वो जमीन के अंदर पानी के स्रोतों का पता लगाते हैं. इसमे बांस को जमीन के ऊपर पकड़कर घूमने के दौरान जब बांस अपने आप ऊपर आ जाए तो वहां पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाती है. इसके बाद उसी स्थान पर खुदाई की जाती है. ग्रामीण ने कहा कि इसके अलावा जब बांस जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगे तो इसका मतलब उस स्थान पर चट्टान है और ये जगह खुदाई के अनुकूल नहीं है.

वहीं इस तकनीक को स्थानीय निवासी भी काफी कारगर मानते हैं. इस संबंध में स्थानीय निवासी अनिल भगत का कहना है कि जहां उन्हें खुदाई करवानी होती है वे उस जगह पर इसी तकनीक का इस्तेमाल कर खुदाई करवाते हैं.



वहीं एक दूसरे निवासी सत्यप्रकाश तिवारी ने कहा कि वे पानी खोजने के इस नायाब तरीके के बारे में पिछले 4-5 सालों से जान रहे हैं. हालांकि ये यहां के लोगों के लिए काफी पुरानी और प्राचीन तरीका है, जिसके बारे में बहुत कम ही लोगों को मालूम है. हालांकि इस तरीके से बोर या कुआं खुदवाने में समय और पैसे दोनों की काफी बचत है.
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