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गजब है...यहां बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं बस मिड-डे मील खाने जाते हैं!

गजब है...यहां बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं बस मिड-डे मील खाने जाते हैं!

जशपुर में एक ऐसा स्कूल है जहां स्कूली बच्चे स्कूल में पढ़ने नहीं सिर्फ मध्यान्ह भोजन खाने आते है. सुबह बच्चे स्कूल पहुंचकर मध्यान्ह भोजन बनने का इंतजार करते है और जब मध्यान्ह भोजन बन जाता है तब बच्चे मध्यान्ह भोजन खाकर वापिस अपने घर चले जाते है.

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है. बगीचा विकासखण्ड का जाड़ाकोना प्राथमिक स्कूल में दो दर्जन से अधिक बच्चे पढ़ते है. इस स्कूल में बच्चे सिर्फ मध्यान्ह भोजन खाने आते है क्योंकि इस स्कूल में एक ही शिक्षक पदस्थ है और वो भी हमेशा स्कूल से गायब रहते है. कभी स्कूल आते भी है तो शराब के नशे में. अब ऐसे हालात में यहां पर बच्चो की पढ़ाई ठप्प पड़ी हुई है.

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जाड़ाकोना प्राथमिक स्कूल में आदिवासी बच्चे अब सिर्फ मध्यान्ह भोजन करने स्कूल आते है. सुबह आकर ये बच्चे स्कूल के बाहर मैदान में बैठकर मध्यान्ह भोजन बनने का इंतजार करते है और जब मध्यान्ह भोजन बन जाता है तो सभी बच्चे मध्यान्ह भोजन करके घर वापिस चले जाते है. ऐसा नहीं की इन हालातों की जानकारी विकासखण्ड में बैठे अधिकारियों को नहीं. ग्रामीणों ने कई बार शिक्षक के खिलाफ शिकायत भी है लेकिन अधिकारी शराबी शिक्षक पर मेहरबान बने हुए है.

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वहीँ अब इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी का अपना ही एक अलग जवाब है. जिला शिक्षा अधिकारी बीआर ध्रुव का कहना है कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. अब देखना होगा कि इस मामले में शिक्षा विभाग कुछ कार्रवाई करता है या फिर इस स्कूल में बच्चे पढ़ाई करने नहीं पहले की तरह मध्यान्ह भोजन करने की आएंगे.

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Tags: Chhattisgarh news, Jashpur news, School Admission

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