शिक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये से यहां बच्चों की बुनियादी शिक्षा हो रही है चौपट
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शिक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये से यहां बच्चों की बुनियादी शिक्षा हो रही है चौपट
शिक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये से यहां बच्चों की बुनियादी शिक्षा हो रही है चौपट

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपने शिक्षकों की बुरी आदतों की वजह से ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. मामला जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड में नवीन प्राथमिक शाला कंडोरा का है.

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं हैं. आपको बता दें कि जशपुर जिले की साक्षरता दर 54.7 % है. यहां सरकार ने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर स्तर पर अच्छी व्यवस्था कर रखी है. बावजूद इसके सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपने शिक्षकों की बुरी आदतों की वजह से ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. मामला कुनकुरी विकासखंड के नवीन प्राथमिक शाला कंडोरा का है.

नवीन प्राथमिक शाला कंडोरा में कुल 34 बच्चे पढ़ने आते हैं. इस स्कूल के बच्चे पढ़ने में काफी होशियार हैं, लेकिन यहां पदस्थ एक शिक्षाकर्मी की शराब पीने की लत से बेहद परेशान हैं. वहीं शिकायत के बाद से शिक्षक ने स्कूल ही आना बंद कर दिया है.

वहीं प्रधानपाठिका ने इस गंभीर मामले को कई महीनों तक दबाए रखा. जब स्कूली बच्चों ने शराबी शिक्षक रुद्रेश कुमार की शिकायत अपने अभिभावकों से की, तब सभी ने आकर शिक्षाकर्मी को शराब के नशे में झूमते पाया. इसके बाद एक पंचनामा बनाकर शराबी शिक्षाकर्मी को कहीं और ट्रांसफर करने के लिए शाला विकास समिति ने बीईओ कुनकुरी को पत्र भेजा.



जशपुर जिले में शिक्षा की गुणवत्ता केवल उन प्रतिभावान छात्र-छात्राओं पर टिकी है जो बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले हैं. ऐसे प्रतिभावान बच्चे प्रदेश की मेरिट लिस्ट में आते हैं तो जिला प्रशासन की खनिज न्यास निधि से खर्च किए गए लाखों का सही उपयोग दिखा दिया जाता है. इसके अलावा बुनियादी प्राथमिक शालाओं में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे ही है.
वहीं छात्रों का कहना है कि शिक्षक जब भी स्कूल में आते हैं तो वे शराब पीकर आते हैं. इतना ही नहीं इस दौरान बच्चों की क्लास लेने के बजाय वे कभी उनसे खेल-खिलवाने में लग जाते हैं, तो कभी डंडे से पीटना शुरू कर देते हैं. ऐसे में बच्चों ने शिक्षक को तत्काल हटाने की बात कही है.

बहरहाल, शराबी शिक्षक पर कार्रवाई कराने की बजाय शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले को दबाने की कोशिशों में लग गए हैं और तो और इस गंभीर मामले पर बीईओ और डीईओ भी चुप हैं.

गौरतलब है कि आए दिन शिक्षकों के शराब पीकर स्कूल आने और बच्चों की पिटाई करने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. बावजूद इसके ऐसे शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं होने और शिक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये से बच्चों की बुनियादी शिक्षा चौपट हो रही है.

 
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