महज इसलिए 21 सालों से BSF के रिटायर्ड मेजर के परिवार का सामाजिक बहिष्कार, अब लगाई इंसाफ की गुहार
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महज इसलिए 21 सालों से BSF के रिटायर्ड मेजर के परिवार का सामाजिक बहिष्कार, अब लगाई इंसाफ की गुहार
बीएसएफ जवान के परिवार वालों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जशपुर (Jashpur) जिले में एक बीएसएफ (BSF) के पूर्व अधिकारी और उसके परिवार का पिछले 21 सालों से सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है.

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जशपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जशपुर (Jashpur) जिले में एक बीएसएफ (BSF) के पूर्व अधिकारी और उसके परिवार का पिछले 21 सालों से सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि समाज के ठेकेदार चंद रुपयों की लालच में अपनी मनमानी पर उतारू हैं. देश की सीमा की सुरक्षा में लगा सेना का मेजर दिन रात कड़ी ड्यूटी कर 40 साल तक देश की सेवा कर लौटे तो उन्हें सामाजिक बुराइयों का सामना करना पड़ा. उन्हें और उनके परिवार को 21 सालों तक सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा है. कई सालों तक वापिस समाज में शामिल करने मिन्नतें फरियाद करते करते मेजर की मौत हाल ही में हो गई. पूरी जिंदगी देश की सेवा करने वाले उस अधिकारी के अंतिम संस्कार में भी गांव और समाज का कोई व्यक्ति शामिल नहीं हुआ.

जशपुर के जुमईकेला निवासी इलियुस खलखो बीएसएफ में मेजर थे।चालीस साल तक उन्होंने बीएसएफ में रहकर देश की सेवा की, लेकिन रिटायर होने के बाद जब वो गांव पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कैथोलिक ईसाई समाज के लोगों ने उनकी पत्नी समेत पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है. क्योंकि गांव का एक युवक गांव की महिला के साथ मारपीट कर रहा था. जब सेना के अधिकारी की पत्नी ने युवक को मारपीट करने से रोका तो नाराज युवक ने गांव मे सामाजिक पंचायत बैठा दी. बैठक में इस परिवार के किसी भी सदस्य को बिना बुलाये समाज के ठेकेदारों ने पूरे परिवार के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान कर दिया.

कई बार बैठकें की
1999 में जब बीएसएफ के मेजर इलियुस खलखो रिटायर होकर घर लौटे तो उन्होंने समाज के कथित ठेकेदारों से मिलकर आधा दर्जन से अधिक बैठकें कर अपने परिवार को किये गए सामाजिक बहिष्कार के फैसले को खत्म कर वापिस समाज मे शामिल करने की मांग की, लेकिन इसके बावजूद समाज को परिवार में शामिल नहीं किया गया. पूरी जिंदगी सामाजिक बहिष्कार का दंश झेला और इस दंश को झेलते झेलते 2019 में रिटायर्ड मेजर की मौत हो गयी. अपनी मौत के चार दिन पहले भी रिटायर्ड मेजर ने भी समाज के तथाकथित ठेकेदारों से समाज में शामिल करने की आखिरी गुहार लगाई थी, लेकिन इस बार भी उनकी बात को अनसुना कर दिया गया. परिवार का कहना है कि इसी टेंशन में उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गयी.
अब न्याय की गुहार


रिटायर्ड मेजर के अंतिम संस्कार में गांव का और समाज का कोई व्यक्ति भी शामिल नहीं हुआ. एक युवक ने अंतिम संस्कार में जाने की कोशिश की तो समाज ने उस पर भी कार्रवाई करने की धमकी दे डाली. किसी तरह अपने चन्द रिश्तेदारों के साथ मिलकर रिटायर्ड मेजर के परिवार ने उनका अंतिम संस्कार किया. पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब तक उनसे जुर्माने के रूप में 25 हजार रुपये लिए जा चुके हैं और उनको समाज मे शामिल करने एक लाख रुपयों की मांग की जा रही है. परिवार अब  पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है. कानूनविद रामप्रकाश पांडे इस पूरी घटना को बेहद शर्मनाक बताते हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे है. जशपुर के एसडीओपी मनीष कुंवर का कहना है कि मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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