दो रिटायर्ड अफसर आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भड़काने के आरोप में गिरफ्तार
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दो रिटायर्ड अफसर आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भड़काने के आरोप में गिरफ्तार
रिटायर्ड अॉफिसर को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस

दो रिटायर्ड अफसर आदिवासियों को सरकार और गैर आदिवासियों के खिलाफ भड़काने के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिए गए हैं. सर्व आदिवासी समाज के दोनों नेताओं हेरमोन किंडो रिटायर्ड आईएएस और जोसेफ तिग्गा रिटायर्ड ओएनजीसी अधिकारी पर 22 अप्रैल को बछरांव में पत्थलगड़ी करते समय भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.

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दो रिटायर्ड अफसर आदिवासियों को सरकार और गैर आदिवासियों के खिलाफ भड़काने के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिए गए हैं.  सर्व आदिवासी समाज के दोनों नेताओं हेरमोन किंडो रिटायर्ड आईएएस और जोसेफ तिग्गा रिटायर्ड ओएनजीसी अधिकारी पर 22 अप्रैल को बछरांव में पत्थरगढ़ी करते समय भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. नारायणपुर थाने में दर्ज एफआईआर के बाद आज दोनों नेताओं को गिरफ्तार किया गया.

वहीं अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में एक ग्रामीण फुलजेन्स को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इस मामले में अभी दर्जनों गिरफ्तारियां शेष हैं. मजिस्ट्रेट ने दोनों आरोपियों को 14 दिन के जुडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया है. जशपुर जिले के बगीचा विकास खण्ड में बादलखोल अभ्यारण्य में संविधान और सुप्रीमकोर्ट के फैसलों की आड़ में कुछ रिटायर्ड अधिकारियों पर आरोप है कि वह  पत्थरगढ़ी कराकर आदिवासियों को सरकार और गैर आदिवासियों के खिलाफ भड़काने का काम कर कर रहे थे.

इसके अलावा पत्थरगढ़ी के बाद बुटँगा,सिहारडाँड़ और बछरांव गांव में साम्प्रदायिक सौहार्द भी खराब होने लगा था. मामला आदिवासी - गैर आदिवासी का न होकर ईसाई वर्सेस हिन्दू का बनता जा रहा था. इस बिगड़ते माहौल को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर नारायणपुर थाने में एफआईआर दर्ज की और दोनों रिटायर्ड अफसरों को गिरफ्तार किया है.



दरअसल पिछले 22 अप्रैल को बगीचा के बछरांव में पहले पत्थरगढ़ी की स्थापना के बाद से ही जिले में तनाव की स्थिति टकराहट में बदल गई थी, पुरे जिले में इसे लेकर अशांति का वातावरण निर्मित हो गया था . इस पत्थjगड़ी के विरोध में बीजेपी ने सद्भावना रैली निकाला और आमसभा के बाद रैली में शामिल राज्य महिला आयोग की सदस्य रायमुनि भगत के नेतृत्व में भीड़ ने बुटँगा गांव में निर्माणाधीन पत्थरगढ़ी को ढहा दिया था जिसे पत्थरगढ़ी समर्थक आदिवासी समुदाय आक्रामक हो गया था और पुलिस बस पर पथराव करने के बाद पुलिस जवानों को बंधक बना लिया था . जिन्हें छुड़ाने गए पुलिस  एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भी बंधक बना लिया गया था.
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