यहां एक साल बाद भी एक्सिस बैंक में शुरू नहीं हुआ कामकाज, लोग परेशान
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यहां एक साल बाद भी एक्सिस बैंक में शुरू नहीं हुआ कामकाज, लोग परेशान
बेल-इन का साधारण शब्दों में मतलब है कि अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं के पैसे से करना. जब उन्हें लगेगा कि वे संकट में हैं और उन्हें इसकी भरपाई करने की जरूरत है, तो वह आम आदमी के जमा पैसों का इस्तेमाल करते हुए अपने घाटे को पाटने की कवायद कर सकेगा.

कांकेर जिले में इस समय अतिसंवेदनशील इलाका अमाबेड़ा में लोग खासे परेशान हैं. दरअसल, यहां बने निजी एक्सिस बैंक में कोई काम नहीं होने की वजह से लोग हताश और निराश हैं. लोगों का कहना है कि उनकी सुविधा के लिए बना यह बैंक सिर्फ एक शो पीस बनकर रह गया है.

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में इस समय अतिसंवेदनशील इलाका अमाबेड़ा में लोग खासे परेशान हैं. दरअसल, यहां बने निजी एक्सिस बैंक में कोई काम नहीं होने की वजह से लोग हताश और निराश हैं. लोगों का कहना है कि उनकी सुविधा के लिए बना यह बैंक सिर्फ एक शो पीस बनकर रह गया है.

आपको बता दें कि देश में नोटबंदी के बाद करीब 1 साल इस बैंक को स्थपित हुए हो गए हैं, लेकिन अब तक इस बैंक में सुचारू रूप से कामकाज शुरू नहीं हो पाया है. हालांकि जब बैंक में काम शुरू भी हुआ, तो नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से बैंक में कोई काम नहीं हो रहा है.

स्थानीय लोगोे का कहना है कि यहां बने महिला समितियों का बैंक अकाउंट नहीं खुलने से समिति में कोई काम नहीं हो रहा है और ना ही सरकार की कोई योजना सही ढंग से यहां लागू हो पा रही है. ऐसे में स्थानीय लोगों ने यहां मोबाइल नेटवर्क को सही करने की मांग की है.



मामले में आमाबेड़ा की सरपंच रुकमनी का कहना है कि जिले में एक्सिस बैंक तो खोल दिया गया, लेकिन लोगों को अब भी बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है. ऐसी स्थिति में पंचायत में काम करने वाले मजदूरों को पैसे देने में भी परेशानी होती है.
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