कभी छिपकलियों से डरने वाली निहारिका सिन्हा, अब ले रही हैं नक्सलियों से लोहा
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कभी छिपकलियों से डरने वाली निहारिका सिन्हा, अब ले रही हैं नक्सलियों से लोहा
असिस्टेंड कमांडेंट निहारिका सिन्हा.

असिस्टेंड कमांडेंट निहारिका सिन्हा कांकेर जिले में चल रही रावघाट रेलवे परियोजना की सुरक्षा में तैनात एसएसबी के 130 जवानों का कर रही हैं नेतृत्व.

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रावघाट के जंगलों में 130 जवानों को लीड कर रही एसएसबी कमांडो असिस्टेंट कमान्डेंट निहारिका सिन्हा नक्सलगढ़ में रेलवे ट्रेक बिछाने में मोर्चा सम्हाले हुए हैं. लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध रावघाट मेंनक्सलियों के खौफ के कारण पिछले 30 साल तक रेलवे लाइन नहीं बिछाई जा सकी. इस खौफ के बीच निहारिका सिन्हा रावघाट रेलवे परियोजना की सुरक्षा में तैनात 130 जवानों का नेतृत्व कर रही हैं.

रावघाट नक्सलियों का गढ़ है, जहां घने जंगलों का रिजर्व फॉरेस्ट है तो कुछ भाग मैदानी इलाका भी है. यहां कुछ छोटे-छोटे गांव भी हैं, जिससे होते हुए रेलवे ट्रैक बनाया जा रहा है. इस निर्माण में लगे लोगों को सुरक्षा देने के बाद कंपनी रोज टेंट में ही विश्राम करती है.

निहारिका छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के फिंगेस्वर गांव की रहने वाली है. पिता पुलिस में रहने के कारण बचपन से ही फौज में जाना चाहती थी. निहारिका ने बताया की फौज में आने के बाद उनकी जीवन शैली  में काफी बदलाव आ गया है. उन्होंने बताया कि कभी वो छिपकली से डरती थी, लेकिन अब फील्ड में हथियार गोला-बारूद और तमाम खतरों के बीच रहने की आदत हो गई है.



निहारिका का कहना है कि सरकार ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वो उसे निभाएंगी. उनका मानना है कि बेटियों को भी अधिक से अधिक फौज में आना चाहिए, क्योंकि लड़कियां सबसे ज्यादा सुरक्षित फौज में ही हैं. निहारिका का कहना है कि महिला अपने दिल से नाजुक होती है, हाथ पैर से नहीं.
 
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