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कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हॉस्टल खुलने के आदेश का इंतजार

कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अब कॉलेज पहुंचने लगे हैं.

कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अब कॉलेज पहुंचने लगे हैं.

छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर से भी छात्रावास खोले जाने की गुहार लगाई है. जिनसे इन पर पड़ रहे आर्थिक बोझ कम हो.

  • Last Updated: March 7, 2021, 5:00 PM IST
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कांकेर. कोरो कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के हॉस्टल के खुलने का आदेश अब तक नहीं आया है. जिसके चलते दूर-दूर से जिला मुख्यालय में पढ़ाई के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं को मकान किराए पर लेकर रहना पड़ रहा है. कई छात्र रोजाना अपने घर से आना-जाना कर रहे हैं.

दोनों ही तरीकों से छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. हॉस्टल नहीं खुलने से परेशान हो रहे छात्र. कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अब कॉलेज पहुंचने लगे हैं. लेकिन छात्रावास अब तक नहीं खोले गए हैं. जिसके चलते परेशान कॉलेज के छात्र- छात्राओं ने छात्रावास को प्रारंभ किए जाने की मांग की है.

किराए के मकान में रह कर पढ़ाई करनी पड़ी
छात्राओं ने बताया कि इससे पहले हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी. लेकिन हॉस्टल बंद होने के कारण उन्हें किराए के मकान में रह कर पढ़ाई करनी पड़ रही है. कई छात्राएं रोजाना दूर-दूर से बस और टैक्सी में सफर कर कॉलेज आ रही हैं. जिससे उन्हें परेशानी हो रही है.
एक बार आने-जाने का किराया 240 रुपए


रोजाना बस और मकान का किराया देने से छात्राओं पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है. बड़गांव निवासी छात्रा सविता रावटे ने बताया कि वो रोजाना 100 किलोमीटर दूर बस से सफर कर कांकेर कॉलेज आती हैं. एक बार आने-जाने का 240 रुपया किराया देना होता है.

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शासन के आदेश की प्रतीक्षा हो रही है
ग्राम कच्चे निवासी छात्रा रितु वट्टी ने बताया कि रोजाना 70 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव से कॉलेज आ रही हैं. कांकेर पीजी कालेज के प्रभारी प्राचार्य केआर ध्रुव ने कहा कि जब तक शासन का आदेश नही आएगा तब-तक हॉस्टल खोल पाना संभव नही है. शासन के आदेश की प्रतीक्षा हो रही है. शासन का जैसे आदेश मिलेगा हॉस्टल खोल दिए जाएंगे. छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर से भी छात्रावास खोले जाने की गुहार लगाई है. जिनसे इन पर पड़ रहे आर्थिक बोझ कम हो.
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