नसबंंदी फेल होने के छह साल बाद हुई पुत्री तो अस्पताल से मांगा मुआवजा

प्रदेश में कायाकल्प स्वच्छता में प्रथम आने वाला सामुदिक स्वास्‍थ्‍य केंद की लापरवाही से एक पुरुष नसबंदी फेल हो गई. नसबंदी के 6 साल बाद जन्मी संतान के मुआवजा के लिए अब यह गरीब भटक रहा है.

News18 Chhattisgarh
Updated: September 10, 2018, 11:04 AM IST
नसबंंदी फेल होने के छह साल बाद हुई पुत्री तो अस्पताल से मांगा मुआवजा
नसबंदी फेल होने पर उसका प्रमाण-पत्र दिखाता पीड़ित दसरू राम
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Updated: September 10, 2018, 11:04 AM IST
प्रदेश में कायाकल्प स्वच्छता में प्रथम आने वाला सामुदिक स्वास्‍थ्‍य केंद की लापरवाही से एक पुरुष नसबंदी फेल हो गई. नसबंदी के 6 साल बाद जन्मी संतान के मुआवजा के लिए अब यह गरीब भटक रहा है. उधर इसके लिए जिम्मेदार अस्पताल प्रबंधन उसकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है. पीड़ित का कहना है कि डॉक्टर की एक गलती से उसकी परिवार का नियंत्रण नहीं हो सका और वो अब आर्थिक तंगी के चलते परेशान है. ग्रामीण के सवाल को जब मीडिया ने अस्पताल प्रबंधक के सामने उठाया तो उन्होंने किसी भी तरह का कोई जवाब नहीं दिया.

कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर के सरकारी सामुदायिक स्‍‍‍‍‍‍‍वास्‍थ्‍य केंद्र प्रदेश में कायाकल्प को लेकर प्रथम आने वाला अस्पताल  है. यहां चारों तरफ साफ-सफाई और चमक देखकर कोई भी इसको देखता है तो निजी अस्पताल समझ लेता है. लोग कल्पना करते हैं कि इतनी अच्छी बिल्डिंग और संसाधन हैं तो अच्छा इलाज होता होगा. लेकिन इसी अस्पताल की एक लापरवाही के चलते एक गरीब परिवार की आर्थिक परेशानी बढ़ गई. बासला गांव के दसरू राम ने यहां छह साल पहले नसबंदी कराई थी, लेकिन डाक्टरों की घोर लापरवाही के चलते अब वह फेल हो गई. अब छह साल के बाद उसके एक पुत्री की जन्म हुआ है. पीड़ित राम ने इसके लिए अस्पताल को दोषी ठहराते हुए मुआवजे की मांग की है.

( जीवानंद हालदार की रिपोर्ट )
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