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राशन लेने कई किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचते हैं आदिवासी

राशन लेने कई किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचते हैं आदिवासी

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोइलिबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय में दर्जनों राशन की शासकीय दुकानें संचालित हैं.

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोइलिबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय में दर्जनों राशन की शासकीय दुकानें संचालित हैं. जिस पंचायत के लिए राशन दुकान स्वीकृत की गई, उस पंचायत तक जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बनाया गया है. बस्तर के अबूझमाड़ के किनारे बसे कई ऐसे गांव हैं, जहां आज तक कोई पहुंच मार्ग ही नहीं बना है, जिसके चलते आज भी कई पंचायत का सरकारी राशन दुकान पंचायत में नहीं खोली जा सकी है.

सड़क नहीं होने के कारण कोइलिबेड़ा में एक ही जगह कई राशन दुकानें संचालित हो रही हैं. लोग महीने में एक बार साप्ताहिक बजार के दिन अपना राशन लेने आते हैं. राशन दुकान के सेल्स में का कहना है कि लोग राशन के लिए दो दिन पहले घर से निकलते हैं. उसके के बाद राशन लेने के बाद एक रात रस्ते में ही रुकते हैं. आदिवासी राशन लेने के लिए 30 से 50 किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं.

कोइलिबेड़ा में कांकेर जिले के ग्रामपंचायत के आलवा भी नारायणपुर जिले की भी राशन दुकानें संचालित हो रही हैं. यहां बरसात के दिनों में तीन महीने तक दुकानें बंद भी रहती हैं. क्योंकि कई नदी उफान पर रहती हैं, जिसके चलते लोग राशन लेने नहीं आ पाते हैं. सरकार भले ही लोगों को पीडीएस चावल की सुविधा मुहैया करा रहा हो, लेकिन लोगों को इन पीडीएस का लाभ लेने कई लोग वंचित भी हो रहे हैं. क्योंकि गांव में सरकारी राशन दुकान नहीं है और वे इतनी दूरी तय कर राशन लेने नहीं आ पाते हैं.
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Tags: Chhattisgarh news, Kanker news, Tribal's demand

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