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मुख्यमंत्री रमन के 'गढ़' में फिर से अपना परचम लहराना चाहेगी कांग्रेस!

(सांकेतिक फोटो)
(सांकेतिक फोटो)

जोगी की पार्टी के कवर्धा से नेता सोनू चावला का कहना है कि उनकी पार्टी न सिर्फ भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती देगी. बल्की जीत भी हासिल करेगी.

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छत्तीसगढ़ का कवर्धा जिला साल 1998 में अस्तित्व में आया, जिला बनने के बीस साल बाद यहां की परिस्थितियों में व्यापक बदलाव हुआ है. कवर्धा मुख्यमंत्री का गृह जनपद है. लिहाजा यहां के चुनाव परिणाम पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है. जिले की दो विधानसभा सीटों के लिए राजनीतिक घमासान शुरू हो चुका है. साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा दोनों सीट पर कब्जा करने में सफल रही है. पार्टी प्रत्याशी जो भी हो, पर चेहरा डॉ. रमन सिंह ही रहते हैं. पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा ही आगे कर चुनाव मैदान में उतरती है.

इस साल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने आपको पिछले चुनाव से काफी मजबूत मान रही है. उसे लगता है कि 15 साल की सत्ता से मदमस्त भाजपाइयों की गाड़ी पटरी से उतरेगी. कवर्धा जिला कांग्रेस का गढ़ रहा है. भाजपा का प्रयास है कि वो अपनी दोनों सीट बचाए रखे. वहीं कांग्रेस फिर से अपना किला फतह करना चाहती है, लेकिन इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को भी कम नहीं आंका जा रहा है. जोगी-बसपा गठबंधन में कवर्धा की पंडरिया विधानसभा सीट तो बसपा के खाते में गई है, पर कवर्धा में जोगी की पार्टी भी अपनी ताकत लगाने में पीछे रहने वाली नहीं है.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कवर्धा व पंडरिया विधानसभा सीट से हार का स्वाद चखना पड़ा था. कवर्धा से कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाने वाले मो. अकबर को भाजपा के नए नवेले नेता से हार का मुंह देखना पड़ा था. वहीं पंडरिया की विधानसभा सीट पर जातीय राजनीति में उलझने के चलते कांग्रेस के लालजी चंद्रवंशी को भाजपा के मोतीराम चंद्रवंशी से हार का सामना करना पड़ा था. कांग्रेस अब अपनी पुरानी गलती से सबक सीखते हुए दोगुनी ताकत से चुनाव के मैदान में उतरने को तैयार है. बता दें, 2013 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले ये दोनों सीटे कांग्रेस का किला कहलाती थी क्योंकि यहां से पार्टी को जीत मिलती थी.



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सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के मो.अकबर का कवर्धा से लड़ना तय है. लिहाजा वे अपनी तैयारी एक साल से कर रहे हैं. वहीं पंडरिया से पूर्व विधायक योगेश्वर राज सिंह मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. कवर्धा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकुंद माधव कश्यप का कहना है कि पिछले चुनाव में पार्टी व प्रत्याशी स्तर पर जो कमियां रह गईं थीं, उसे इस चुनाव में दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. इसके साथ ही जनता प्रदेश की भाजपा सरकार से त्रस्त है, जिसका लाभ कांग्रेस को चुनाव में मिलेगा.

दूसरी ओर भाजपा अपने विकास के रथ पर सवार होकर एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है. भाजपा को लगता है कि 15 साल के विकास के भरोसे उनकी चुनावी नैय्या पार लगेगी. जिले की दोनों विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा है, जिसे वह इस चुनाव में भी बनाए रखना चाहती है. इसके अलावा कवर्धा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का गृह जनपद है. सीएम की साख इन सीटों पर लगी हुई है. लिहाजा भाजपा अपनी ओर से कोई कोर कसर छोड़ने वाली नहीं है.

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प्रदेश के संसदीय सचिव मोतीराम चन्द्रवंशी का कहना है कि भाजपा सरकार ने पिछले 15 साल में प्रदेश का काफी विकास किया है. विकास के मुद्दे पर ही इस बार चुनाव लड़ा जाएगा. कवर्धा जिले की दोनों सीटें इस बार के चुनाव में फिर से भाजपा के खाते में आएंगी. जनता का भरोसा भाजपा के साथ बना हुआ है. पार्टी को चुनाव में इसका लाभ मिलना तय है.

भाजपा-कांग्रेस के बीच पूर्व सीएम अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को भी नहीं भुला जा सकता. बसपा-जोगी कांग्रेस में टिकट बंटवारे में भले ही पंडरिया की सीट बसपा की झोली में गई है, लेकिन कवर्धा विधानसभा सीट जोगी कांग्रेस के खाते में है. राजनीति के महारथी कहे जाने वाले अजीत जोगी कवर्धा विधानसभा सीट का महत्व जानते हैं. इसलिए वो भी अभी अपने पत्ते खोलने में समय ले रहे हैं. जोगी की पार्टी के कवर्धा से नेता सोनू चावला का कहना है कि उनकी पार्टी न सिर्फ भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती देगी. बल्की जीत भी हासिल करेगी.

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