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कवर्धा में पूर्व CM डॉ. रमन सिंह ने कहा- दलाल कहकर किसानों का अपमान कर रही कांग्रेस

पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने सीएम भूपेश बघेल को एक पत्र लिखा है.  (File Photo)
पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने सीएम भूपेश बघेल को एक पत्र लिखा है. (File Photo)

मालूम हो कि यहां सात दिनों से किसान धरना दे रहे हैं. हालत ये है कि किसान मौके पर बैठकर फागगीत गाकर भूपेश सरकार को कोस रहे हैं.

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कवर्धा. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह (Dr. Raman Singh) मंगलवार को कवर्धा जिले के दौरे पर रहे. रमन सिंह कवर्धा (Kawardha) में चल रहे किसान आंदोलन (Farmer Protest) में शामिल हुए. उन्होंने बिरकोना के धरना स्थल पहुंचकर किसानों को संबोधित किया. किसानों के आंदोलन को जायज बताते हुए किसानों की मांगों का रमन सिंह ने समर्थन किया. बिरकोना के बाद वे कवर्धा पहुंचे, जहां कलेक्टर कार्यालय के बाहर किसानों के साथ धरने में शामिल हुए. मालूम हो कि यहां सात दिनों से किसान धरना दे रहे हैं. हालत ये है कि किसान मौके पर बैठकर फागगीत गाकर भूपेश सरकार को कोस रहे हैं.

डॉ. रमन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार निर्मम और कठोर हो गई है. किसानों को कांग्रेस कोचिया,दलाल कहकर अन्नदाताओं का अपमान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमने विधानसभा में भी स्थगन प्रस्ताव लाया, धान खरीदी के मुद्दे को उठाया. पर ये सरकार अंहकारी सरकार हो गई है. किसानों की मांगों को सुनने को तैयार नहीं है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सच्चाई जाननी है तो कवर्धा आकर कवर्धा विधायक और मंत्री मोहम्मद अकबर को खुद आकर देखना चाहिए कि धरने पर कौन बैठे हैं. अगर हिम्मत है किसानों के सामने बोले कोचिया-दलाल. किसान उनको जवाब देंगे.

पिछले 5 दिनों से कवर्धा में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.




किसानों का प्रदर्शन
मालूम हो कि कवर्धा में 20 फरवरी की शाम 4 बजे से शुरू किया गया हाइर्वे पर चक्काजाम 5 दिन बाद भी जारी रहा. किसान अपनी एक सूत्रीय मांग पर अड़े हुए हैं. किसानों के इस प्रदर्शन के चलते कवर्धा से गुजरने वाले एक नेशनल हाईवे समेत 5 हाईवे पर आवागमन बंद हो गया था.  किसानों की मांग है कि सरकार ने तय समय सीमा में जिन किसानों को धान बेचने का टोकन जारी किया था, उनके धान खरीदे जाएं. यदि सरकार के पास बारदाने नहीं हैं तो किसान अपना बारदाना भी देने को तैयार हैं. लेकिन अब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. इससे परेशानी बढ़ती जा रही है.

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