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बस्तर में मरने के बाद अब शवों को नहीं जलाएगा गोंडवाना समाज, करेंगे ये काम

Vivek Shrivastava | News18 Chhattisgarh
Updated: January 15, 2020, 1:37 PM IST
बस्तर में मरने के बाद अब शवों को नहीं जलाएगा गोंडवाना समाज, करेंगे ये काम
जीवन के साथ संस्कारों का घनिष्ठ सम्बन्ध है और भारतीय जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक के 16 संस्कारो का बड़ा महत्त्व है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) संभाग के कोंडागांव (Kondagaon) जिले के गोंडवाना (Gondwana) समाज ने एक अनोखा फैसला लिया है.

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कोंडागांव. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) संभाग के कोंडागांव (Kondagaon) जिले के गोंडवाना (Gondwana) समाज ने एक अनोखा फैसला लिया है. आलोर क्षेत्र में रहने वाले गोंडवाना समाज ने जल, जंगल जमीन के साथ ही पर्यावरण (Environment) को बचाने के लिए ये निर्णय लिया है. इस निर्णय के तहत मरणोपरांत अब न ही दाह संस्कार किया जायेगा और न ही मृतक के नाम से मठ बनाया जाएगा. समाज के लोगों का मानना है कि इससे पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचता है.

जीवन के साथ संस्कारों का घनिष्ठ सम्बन्ध है और भारतीय जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक के 16 संस्कारो का बड़ा महत्त्व है. चाहे वह जन्म संस्कार हो या फिर अंतिम संस्कार. मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार करने और अस्थि विसर्जन की परंपरा है, पर अब आलोर के गोंडवाना समाज ने निर्णय लिया है कि न तो दाह संस्कार होगा और न ही अस्थि का नदी या तालाब में विसर्जन किया जायेगा.

Chhattisgarh
कोंडागांव के फरसगांव ब्लॉक के गोंडवाना समाज के अध्यक्ष रामलाल कोर्राम.


पर्यावरण को नुकसान का हवाला

कोंडागांव के फरसगांव ब्लॉक के गोंडवाना समाज के अध्यक्ष रामलाल कोर्राम ने बताया कि दाह संस्कार से उठाने वाले धुंए से वातावरण दूषित होता है. वहीं नदी या तालाब में अस्थि विसर्जन से पानी दूषित होता है. इसलिए ही समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से ये निर्णय लिया है. इतना ही नहीं बस्तर में अपनों की मौत के बाद उसकी याद में मठ बनाने परम्परा चल रही है. जिले के अंदरूनी इलाको में मृतकों की याद में मृतक की अधूरी ख्वाहिश पूरी करते मृतक स्तम्भ या मठ बने हुए हैं. आलोर में हुए ग्राम सभा में ग्रामीणों ने फैसला किया कि अब मृतकों के नाम से मठ नहीं बनाए जाएंगे. गोंडवाना समाज के अध्यक्ष राम लाल कोर्राम ने बताया कि मठ बनाने से जगह की कमी होने लगी है. वहीं बने हुए मठ को तोड़ा नहीं जा सकता है.

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First published: January 15, 2020, 1:37 PM IST
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