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साल में एक बार सिर्फ एक दिन के लिए खुलती है गुफा, ये मन्नत लेकर आते है दंपति!

साल में एक बार सिर्फ एक दिन के लिए खुलती है गुफा, ये मन्नत लेकर आते है दंपति!

इस पहाड़ी से बेहद अनोखी मान्यता भी जुड़ी हुई है,

इस पहाड़ी से बेहद अनोखी मान्यता भी जुड़ी हुई है,

हर साल भादो माह में नवमी तिथि के पहले बुधवार को साल में एक बार और एक ही दिन के लिए खोला जाता है.

    कोण्डागांव.  छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव (Kondagaon) जिले की एक अनोखी गुफा अपने खास मान्यता के लिए फेमस है. फरसगांव क्षेत्र में आलोर (Allora) पंचायत की पहाड़ी में एक एसी गुफा है जो साल में एक बार महज एक दिन के लिए ही खुलती है. इस गुफ़ा (Cave) मंदिर का श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार रहता है. लोगों की मान्यता है कि यहां संतान पाने की मन्नत लेकर दंपत्ति आते है और उनकी मनोकामना पूरी भी होती है. हर साल भादो माह में नवमी तिथि के पहले बुधवार को साल में एक बार और एक ही दिन के लिए खोला जाता है. साल में एक दिन खुलने वाले इस गुफा का द्वार पत्थरों से बंद किया जाता है जिसे विधि विधान से खोला जाता है. गुफा खोलते ही दरवाजे पर जो भी पग चिन्ह मिलता है उससे बस्तर ही नहीं पूरे देश में भविष्य में होने वाली हलचल का अनुमान लगाया जाता है. हम किसी तरह के अंधविश्वास को फैला नहीं रहे है. इस गुफा को लेकर सिर्फ ये यहां के लोगों की मान्यता मात्र है.

    ये मन्नत लेकर आते है दंपति

    वरिष्ठ नागरिक रामलाल कोर्राम का कहना है कि पहाड़ी में एक गुफा है जिसमे लिंगेश्वरी माता विराजमान है. इस गुफा का एक ही प्रवेश द्वार है जो सुरंगनुमा है जहां बैठकर या लेटकर ही प्रवेश किया जा सकता है. यहां मनौती मांगने का तरीका भी अपने आप में निराला है. रामलाल बताया है कि संतान की कामना लेकर आए दंपतियों को यहां खीरा चढ़ाना अनिवार्य है.

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    स्थानीय निवासी "लिंगई याया "(लिंगई माता ) की पूजा करते है.


    इसी खीरे को पुजारी द्वारा पूजा के बाद दंपति को वापस किया जाता है जिसे दंपति द्वारा स्वयं के नाखून से फाड़कर कडुआ भाग सहित ग्रहण करना होता है. पिछले साल एक हजार सत्ताइस लोगो ने संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी है. वहीं 337 लोगों की पिछले वर्ष मन्नत पूरी हो चुकी है. आलोर की पहाड़ी सिर्फ श्रद्धा का ही स्थान नहीं है यहां पर बेहतर सामाजिक व्यवस्था का नजारा भी देखने को मिलता है. समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी तय रहती है. जिसे जो काम दिया गया है, वर्षों से वे ही उस काम को पूरा कर रहे है.

    होती है इनकी पूजा

    गुफा के अंदर बीचोंबीच पत्थर के लिंग की आकृति है जिसकी ऊंचाई डेढ़ से दो फीट है. इस आकृति को स्थानीय निवासी "लिंगई याया "(लिंगई माता )पुकारते हैं. यहां संतान प्राप्ति की कामना लिए दंपति आते हैं. कठिन चढ़ाई चढ़ कर लिंगेश्वरी माता के दर्शन का नियम है. दर्शन करने कंकड़ भरी राहो से ऊपर जाना होता है वापस सीढ़ियों से आने की व्यवस्था है.

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    Tags: Chhattisgarh news

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