दम तोड़ रहा CM भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट, लापरवाही की भेंट चढ़ा पहला गोठान

प्रदेश का पहला गोठान कोंडागांव में बनाया गया था.
प्रदेश का पहला गोठान कोंडागांव में बनाया गया था.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) अपने ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरवा, घुरुवा और बाड़ी को साकार करने के लिए कोंडागांव के बड़े कनेरा में प्रदेश के पहले गौठान की शुरुआत की थी.

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कोंडागांव. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) अपने ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरवा, घुरुवा और बाड़ी को साकार करने के लिए कोंडागांव के बड़े कनेरा में प्रदेश के पहले गौठान की शुरुआत की थी, लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते राज्य का पहला गोठान बदहाली की हालत में पहुंच गया है. ये गोठान साल भर के भीतर ही दम तोड़ता नजर आ रहा है. बताया जा रहा है कि पैसे नहीं मिलने से चरवाहों ने काम छोड़ दिया है. इस गोठान में काम कर रही महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं भी पैसे नहीं मिलने से परेशान हैं.

प्रदेश में सरकार बनने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कृषि को बढ़ावा देने और किसानों के फायदे को ध्यान में रखते हुए नरवा, गरवा, घुरुवा, बाड़ी योजना बनाई. अपनी इस योजना को असली जामा पहनाते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोंडागांव जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर बड़े कनेरा गांव में एक साथ आमचो-गांव आमचो-गोठान का लोकार्पण कर किया था.

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गोठान में बैठीं महिलाएं.




महिला समूह को दी जिम्मेदारी
गोठान के लोकार्पण के बाद प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी योजना को सजाने और संवारने का काम गांव की महिला समूह को दिया गया था. शीतला स्वसहायता समूह की महिलाओं को अधिकारियो ने गाढ़ी कमाई होने का सपना दिखाया. महिला समूह की अध्यक्ष भानमती बघेल ने बताया की तत्कालीन सीईओ नुपुर राशि पन्ना ने कहा था कि गोठान के अंदर लगे ईमली, महुआ, आम और अन्य लगाए गए पौधों के बढ़ने के बाद मिलने वाले फलों तथा लगाए गए चारे तथा मवेशियों के गोबर व कचरे से बनाए गए खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि के विक्रय जो रकम मिलेगी वही उनकी आमदनी होगी.

अधिकारी बदले-बिगड़ी हालत
उद्घाटन के कुछ समय बाद बडेकनेरा गोठान में सब कुछ ठीक चल रहा था. तत्कालीन सीईओ नुपुर राशि पन्ना ग्रामीणों को उनके पशुओं को गोठान तक लाने के लिए समझाती थी तो इधर स्वसहायता समूह की महिला सदस्यों को कुछ नया कम कर आर्थिक उन्नति करने के लिए प्रेरित करती थी. पर अधिकारी के बदलते ही गोठान में सन्नाटा पसरना शुरू हो गया और साल पूरा होते-होते पूरी तरह गौठान उजाड़ की हालत में पहुंच गया है.

नीलाम हो गया आर्थिक स्त्रोत
महिला समूह को आर्थिक समस्या से जूझना पड़ रहा है. पैसे नहीं मिलाने से चरवाहों ने काम छोड़ दिया है. बडेकनेरा के ग्रामीण अपने मवेशियों को गोठान में भेजना ही बंद कर दिया. गोठान में मवेशी नहीं लाए जाने से वे खाद तो बना नहीं सकी. स्वसहायता समूह की महिलाओं को उम्मीद थी वे इमली बेचकर कुछ आमदनी हासिल कर लेंगे, लेकिन विगत दिनों ग्राम पंचायत की महिला सरपंच ने गोठान में दखल देकर ईमली के पेड़ों को ग्राम पंचायत की सम्पत्ति बताते हुए इमली को ही नीलाम कर दिया. वर्तमान में समूह की महिलाएं आमदनी नहीं होने के कारण अपने परिजनों से मिल रहे तानों से बेहद परेशान नजर आ रही हैं. उन्हें मजबूरन घर के अन्य सदस्यों से ताने सुनने पड़ रहे हैं. कुल मिलाकर साल भर में उनकी आमदनी जीरो रही.

उम्मीदों पर फिरा पानी
गोठान में चारे के लिए घास लगाये गए थे और इसके लिए बकायदा बोर कर पम्प लगाया था. महिला समूह को उम्मीद थी की सिंचाई के साधन होने से घास के आलावा अन्य जरुरत के की खेती बाड़ी कर सकेंगी. सिंचाई के लिए लगाये गए पाईप चोरी हो गए जिसके चलते लगाये गए घास सुख गए. इस तरह प्रशासनिक लापरवाही के चलते महिला समूह के साथ साथ मुख्यमंत्री की की उम्मीदों पर पानी फिर गया. वहीं सरकार की गोठान योजना अब दम तोड़ती नजर आ रही है.

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