आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं यहां के ग्रामीण, पीना पड़ता है झरिया का पानी

छत्तीसगड़ के कोंडागांव जिले में प्रदेश सरकार अक्सर नक्सलवाद के खात्मे के साथ संवेदनशील एरिया में विकास के दावे करती है, लेकिन फरसगांव ब्लॉक के बड़गई गांव के ग्रामीणों को आज तक पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं हुई है.

Vivek Shrivastava | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 12:55 PM IST
आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं यहां के ग्रामीण, पीना पड़ता है झरिया का पानी
आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं यहां के ग्रामीण
Vivek Shrivastava | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 12:55 PM IST
छत्तीसगड़ के कोंडागांव जिले में प्रदेश सरकार अक्सर नक्सलवाद के खात्मे के साथ संवेदनशील एरिया में विकास के दावे करती है, लेकिन फरसगांव ब्लॉक के बड़गई गांव के ग्रामीणों को आज तक पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं हुई है. आलम यह है कि आज विकास के दावों के बीच ग्रामीण पेयजल की संकट से जूझते हुए झरिया का पानी पीने को मजबूर हैं.

मामले में बड़गई सरपंच रूपोति मरकाम ने बताया कि फरसगांव से करीब 40 किलोमीटर दूर बड़गई गांव की जनसंख्या करीब 2200 है. ऐसे में यहां सड़क, बिजली, चिकित्सा सुविधा और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की बात छोड़ दीजिये तो पानी की समस्या सबसे ज्यादा जटिल है. 2 पारा में 40-45 परिवार के लिए 3 नल हैं, जो सालों से खराब हैं.

मजबूरीवश ग्रामीणों को झरिया का पानी पीना पड़ता है. बरसात में जब झरिया पानी से भर जाता है तब भी ग्रामीण उसी गंदे पानी को पीते रहते हैं. इस समस्या के बारे में शासन प्रशासन के सामने कई बार गुहार लगाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ गांव के सरपंच रूपोती नेताम का कहना है कि हमने कई बार इन समस्याओं के बारे में लोक सुराज, जनसमस्या शिविर और संबंधित विभागों में आवेदन के माध्यम से गुहार लगाई, लेकिन हमारी कोई सुनता नहीं है.

मालूम हो कि सरकार शहरी क्षेत्रों में जगह जगह वाटर एटीएम बनवा रही है ताकि लोगों को पीने के लिए साफ और शुद्ध पानी मिल सके. वहीं अंदरूनी पहुंच विहीन गांवों की स्थिति जस की तस आज भी बनी हुई है. इन गांवों के रहवासी आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं.

ऐसे में असहाय ग्रामीण अपने आप को फिर से ठगा हुआ महसूस करने लगे हैं. अपने स्वयंभू नेताओं को जी भर कर कोसते हैं. वहीं मामले में गांव की महिला लछनी नरेटी का कहना है कि सालों से नल खराब है. उन्होंने कहा कि जीने के लिए पानी जरूरी है इसी मजबूरी में वे प्यास लगने पर झरिया का पानी पीते हैं.

सरकार गांव के अंतिम छोर तक विकास के मखमली चादर बिछाने का दावा करती है, लेकिन बड़गई जैसे कई गांवों की हालत जहां लोगों को झरिया का पानी पीना पड़ रहा है.

 
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