Chhattisgarh: गश्त पर निकले DRG के जवानों पर फायरिंग, मुठभेड़ में दो नक्सली ढेर

कोंडागांव में नक्सली मुठभेड़. (फाइल फोटो)

कोंडागांव में नक्सली मुठभेड़. (फाइल फोटो)

Kondagaon Naxali Encounter: मंगलवार को कोंडागांव जिले में डीआरजी के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ (Maoist Encounter ) हुई. मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए है.

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कोंडागांव.  छत्तीसगढ़ के कोंडागांव (kondagaon) में सुरक्षा बल के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ (Naxal Encounter) हुई. बस्तर आईजी पी.सुंदरराज ने दो नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी दी है. साथ ही कई नक्सलियों के घायल होने की भी खबर है. मंगलवार को केशकाल अनुविभाग के धनोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुएंमारी के जंगलों में पुलिस के डीआरजी जवान और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. कोंडागांव पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि डीआरजी के जवान गश्त पर निकले थे. तभी नक्सलियों ने जवानों को देखर फायरिंग शुरू की.

एसपी का कहना है कि जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलियां चलाई है. अभी भी रुक रुक कर फायरिंग हो रही है. मुठभेड़ में कुछ नक्सलियों के मार जाने की खबर है. एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि  फिलहाल जवान अंदर जंगल में हैं. सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा कुछ बताना फिलहाल संभव नहीं है.

ग्रामीणों को उकसा रहे नक्सली

कोरोना की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ में जहां लॉकडाउन लगाया गया है, वहीं इस कठिन समय में भी नक्सली, ग्रामीण आदिवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं. दरअसल, सुकमा में नक्सलियों के गढ़ सिलगेर के जंगल में पुलिस कैम्प खुलने के विरोध में ग्रामीण आदिवासी पिछले 14 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि इन आदिवासियों को इलाके के नक्सली हिंसक लड़ाई के लिए उकसा रहे हैं. बीते दिनों 7000 से ज्यादा आदिवासी पुलिस कैंप के विरोध में इकट्ठा हुए. इन्हें नक्सलियों ने मीटिंग के लिए इकट्ठा किया था. कोरोनाकाल में इतनी बड़ी भीड़ जुटी, जिसमें न तो किसी ने मास्क पहना था और न सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीज दिखी.


आपको बता दें कि इसी महीने 5 मई को सुकमा के घोर नक्सल प्रभावित इलाके में पुलिस का कैम्प खोला गया, जिससे नक्सली भयभीत हो गए हैं. यही वजह है कि नक्सलियों ने पुलिस कैंप के खिलाफ आदिवासियों को आगे रखकर आंदोलन खड़ा कर दिया है. पुलिस ने आदिवासियों को समझा-बुझाकर वापस लौटाने की कोशिश की. कुछ लोग लौट भी गए, लेकिन 17 मई को नक्सलियों ने आदिवासियों को फिर से इकट्ठा किया. उसी दिन पुलिस कैंप पर पत्थर फेंके गए और एक थाने को जलाने की कोशिश की गई. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आंसू गैस के गोले दागे, तो नक्सलियों ने फायरिंग भी की.

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