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बालको हादसे की आठवीं बरसी, प्रभावितों ने कहा अब तक नहीं मिला न्याय

सांकेतिक फोटो

सांकेतिक फोटो

छत्तीसगढ़ के कोरबा में बहुचर्चित बालको चिमनी हादसे की आठवीं बरसी 23 सितंबर को है. इस बड़ी दुर्घटना में 40 मजदूरो की मौत बालको में चिमनी के ढहने से हुई थी.

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छत्तीसगढ़ के कोरबा में बहुचर्चित बालको चिमनी हादसे की आठवीं बरसी 23 सितंबर को है. देश के हालिया औद्योगिक इतिहास की इस बड़ी दुर्घटना में 40 मजदूरो की मौत बालको में चिमनी के ढहने से हुई थी. हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने अब तक न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाया है.
प्रभावितों के परिजनों का आरोप है कि जस्टिस बक्शी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पायी है.
ऐसे में अब न्याय मिलने की आस टूटने के साथ सवाल खड़े हो रहे हैं.
आपको बता दें कि 23 सितंबर 2009 को दोपहर दो से तीन बजे के बीच छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगरी कोरबा में वेदांता-बालको पॉवर प्लांट विस्तार परियोजना 1200 मेगावाट की दो चिमनियों में से एक निर्माणधीन चिमनी जमीनदोज हो गई. 225 मीटर ऊंची चिमनी उस वक्त गिरी जब चिमनी के ऊपरी भाग में निर्माण कार्य चल रहा था. बारिश के कारण निर्माण कार्य में लगे सैकड़ों मजदूर चिमनी की गुमटी और आसपास बने शेड में छिपे थे. जैसे ही चिमनी गिरी मजदूरो में अफरा-तफरी मच गई.
सरकारी आंकड़ों में दुर्घटना में 40 मजदूरों की मौत होना बताया गया. जबकि स्थानीय लोग 40 से ज्यादा मजदूरों की मौत की बात कहते हैं. घटना के बाद चारों तरफ मलबा व खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थीं. मलबा हटाने और लाशें निकालने रेसक्यू ऑपरेशन दस दिन से ज्यादा चला.
इस दुर्घटना में 17 आरोपी बनाए गये हैं, जिसमें कोरबा पुलिस 12 आरोपियों को ही गिरफ्तार कर सकी. पांच आरोपी अब भी फरार हैं. मृतक के परिजनों का आरोप है कि इन 8 सालो में काफी चक्कर लगाने के बाद मुआवजा तो मिला, लेकिन नौकरी नहीं मिली. बताते हैं कि 40 मृतकों में से सिर्फ एक की बेवा को ही नौकरी मिल सकी है.
गौरतलब है कि हादसे के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया, जिसका अध्यक्ष जस्टिस संदीप बख्शी को बनाया गया. सुनवाई 34 महिने में पूरी हुई. आयोग ने सरकार को जांच रिपोर्ट 9 अगस्त 2012 को सौंपी. 122 पेज की इस रिपोर्ट में आयोग ने बालको, चीनी ठेका कंपनी सेपको, ठेका कंपनी जीडीसीएल, नगर पालिका निगम, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, श्रम विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता को जिम्मेदार बताया.
बालको कर्मचारी संघ के महामंत्री राजेन्द्र मिश्र कहते हैं कि मजदूरों के साथ न्याय में हो रही लेट लतीफी से साफ है कि प्रबंधन व सरकार इसे लेकर उदासीन है. हादसे में मृत भोला सिंह राजपूत की पत्नी रामकली कहती हैं कि दोषियों पर किसी कार्रवाई होनी चाहिए. ताकि दोबारा कभी भी ऐसी लापरवाही न हो. हमें अब तक न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक आयोग की जांच रिपोर्ट आने के पहले ही बालको ने नई चिमनी का अवैध रूप से निर्माण भी कर लिया. बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया. सूत्रों के मुताबिक चिमनी निर्माण के लिए नगर पालिक निगम, टाउन एंड कंट्री प्लांनिंग और वन विभाग से एनओसी नहीं ली गई है.
आपको बता दें कि कोरबा नगर निगम ने अवैध निर्माण के विरोध में बालको नगर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है.
बालको कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन व सीएसआर हेड आशीष रंजन का कहना है कि प्रबंधन मृतक के परिजनों को मुआवजा दे चुका है. नियमानुसार नौकरी देने की कवायद भी हो रही है. हादसे में प्रभावितों के बच्चों को रोजगार से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग और स्कॉलरशीप भी दी गई है.

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