छत्तीसगढ़ के 'सर्पलोक' में मिला अनोखा सांप, बिल्ली जैसी हैं आंखे, देखें ये हैरान करने वाला VIDEO

(सांकेतिक तस्वीर)
(सांकेतिक तस्वीर)

खरमोरा निवासी उमेश कर्श ने जैसे ही अपने घर में अजीबोगरीब सांप को देखा उनके होश उड़ गए और चीखने लगे.

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  • Last Updated: October 22, 2020, 1:06 PM IST
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कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित वन जैविविधता से समृद्ध है. यहां समय-समय पर वन्य जीवों की नई-नई प्रजातियां मिलती रहती हैं. ऐसे में यहां पिछले कुछ महीनो से लगातार सांप मिलने का सिलसिला जारी है, जशपुर को सर्पलोक भले ही कहा जाता है, लेकिन अब लगातार मिल रहे सांपो से कोरबा जिला भी 'सर्पलोक' बन गया है. जिले में अभी तक विभिन्न प्रजाति के सांप मिल चुके हैं. ऐसे में यहां एक बार फिर दुर्लभ प्रजाति का सांप मिला है. खरमोरा निवासी उमेश कर्श के अपने घर में अजीबोगरीब सांप को देखते ही होश उड़ गए और चीखने लगे. ऐसे में उन्होंने बिना देरी किए स्नेक रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी को इस बात की जानकारी दी.

जितेंद्र उस समय घोड़ा करैत पकड़ रहे थे. ऐसे में सांप की सूचना मिलने पर बिना देरी किए उन्होंने अपनी टीम के सदस्य को मौके पर भेज दिया. स्नेक रेस्कू टीम के सदस्य जब वहां पहुंचे तो उन्होंने अपने साथी जितेंद्र सारथी को जानकारी दी की यह कॉमन कैट स्नेक है. सांप रेस्क्यू कर टीम के सदस्य जितेंद्र के पास पहुंचे, तब जाकर घर वालों ने राहत की सांस ली. जितेंद्र सारथी ने बताया कि यह सांप दुर्लभ प्रजाति का हैं. जिसे कॉमन कैट स्नेक के नाम से जाना जाता है. यह नाम उसे उसकी आंखों के कारण मिला.

जितेन्द्र ने बताया कि ये कम जहर वाला सांप हैं. जिसके काटने से वयस्क व्यक्ति की मौत नहीं हो सकती है, लेकिन ये किसी छोटे बच्चे को काट ले तो मौत हो सकती हैं. दुर्लभ प्रजाति का सांप होने की वजह से वन विभाग को जानकारी देना आवश्यक था जिसके लिए जितेंद्र सारथी अपने टीम के साथ वन विभाग पहुंचे और सांप की जानकारी दी, फिर सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया.




वहीं हाल ही में जिले में जैविविधता पर काम करने वाली संस्था छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा और रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यू सोसाइटी व वन विभाग के वन रक्षक दल के सयुक्त सर्वेक्षण के दौरान लेमरू वन परिक्षेत्र में मालाबार पिट वाइपर मिला था. यह पिट वाइपर पश्चिम घाट के आलावा पहली बार अन्य स्थान पर मिला.

कोरबा वन मंडल के डीएफओ गुरुनाथन एन कोरबा ने इस बारे में बात करते हुए बताया था कि इसका पाया जाना कोरबा के जंगलों की समृद्धता को दर्शाता है. इसे विशिष्ट शोध के लिए उच्च संस्थानों को भेजा जाएगा व इसके संरक्षण के लिए कार्य किया जाएगा. मालाबार पिट बइपर हरे और भूरे रंग में पाए जाते हैं. यहां पर हरे मार्फ की प्रजाति मिली है, जो छोटा है. इस प्रजाति के सांपों के क्षेत्र में और पाए जाने की संभावना है.
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