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भीषण गर्मी में भी बराबर बहता है यह रहस्यमयी झरना, वैज्ञानिक पता नहीं लगा पाए स्रोत, जानें पूरी कहानी

गांव के निवासी इतवार सिंह बताते हैं कि साल के 12 महीने झरने से बराबर पानी बहता है.

गांव के निवासी इतवार सिंह बताते हैं कि साल के 12 महीने झरने से बराबर पानी बहता है.

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक रहस्यमयी झरना है. यह झरना किसी पहाड़ से नहीं बल्कि जमीन से निकलता है. साल के 12 महीने इस झरने का प्रवाह बराबर रहता है. आस-पास की जमीन सूख जाने के बाद भी इस झरने में पानी कम नहीं होता. वैज्ञानिकों के कई बार प्रयास के बाद भी इसके स्त्रोतों की जानकारी नहीं लगा पाए हैं. यह झरना ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है.

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कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक रहस्यमयी झरना है. ये झरना पूरे साल ग्रामीणों को पानी देता है. भीषण गर्मी में भी इसके जल का प्रवाह कम नहीं होता. जिला मुख्यालय से 16 किलो मीटर दूर बसी ग्राम पंचायत कोरकोमा में यह झरना मौजूद है. कई सालों से यह लगातार ग्रामीणों के लिए जल का प्रमुख स्त्रोत बना हुआ है. ग्रामीणों ने इस झरने के नीचे एक तालाब बनवा दिया है. जिससे इसके पानी का संरक्षण किया जा सके. इस पानी का पीने के साथ खेती में भी जमकर इस्तेमाल होता है. इस झरने का नाम भी ग्रामीणों ने रखा है. इसे तुर्री झरने के नाम से जाना जाता है.

इस गांव के निवासी इतवार सिंह बताते हैं कि साल के 12 महीने झरने से बराबर पानी बहता है. यह झरना ग्रामीणों के लिए बहुत पूज्य है. इसके पानी का इस्तेमाल शुभ कार्यों में किया जाता है. इस गांव की आबादी करीब 3500 है. जो पूरी तरह इस झरने पर निर्भर है. इतवार बताते हैं कि यह झरना कई सौ साल पुराना है. यह एक प्राकृतिक झरना है. इसके आस-पास की जमीन सूखी रहती है. लेकिन यह झरना गर्मियों के समय भी भरपूर पानी देता है. झरने के पानी के सतत स्त्रोत की कई बार खोज की गई. लेकिन अभी तक इसका मुख्य कारण नहीं पता नहीं चल पाया है.

ग्रामीणों ने पानी को सहेजने बनवाया तालाब
ग्रामीणों ने बताया कि हमारे पूर्वजों के समय से ही यह झरना यहां मौजूद रहा है. इसके पानी की पूजा की जाती रही है. इसका पानी बर्बाद ना हो इसलिए सिंचाई विभाग द्वारा इसके नीचे तालाब बनवा दिया गया है. अब झरने का पानी तालाब में भरा रहता है. इसका समय-समय पर सौंदर्यीकरण भी होता रहता है. पंचायत के द्वारा गांव में टंकी रखवाने पर भी विचार किया जा रहा है. इससे तालाब के पानी को सीधे घरों में भी पहुंचाया जा सकता है. ग्रामीण बताते हैं कि इसके स्त्रोत के बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिली है. वैज्ञानिकों ने इसकी खोज करने का कई बार प्रयास किया लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी.

क्या कहते हैं भूगोल के जानकार
भूगोल के जानकर बताते हैं कि सामान्यतः जल स्रोत तीन तरह के होते हैं. पहले स्त्रोत में पानी हवा में मौजूद होता है. दूसरा स्रोत सतह पर होता है. यह हमें तालाबों और झरनों के रूप में देखने को मिलता है. तीसरा स्रोत भूमिगत होता है. तुर्री का पानी भूमिगत जल स्रोत का ही एक रूप है. यहां दूर से अंदर ही अंदर किसी नाली की तरह बहते हुए पानी पहुंच रहा है. आमतौर पर पहाड़ों पर से इस तरह की नदियों का उद्गम होता है. लेकिन यहां के पानी का उद्गम अपने आप में रहस्य है.

घेंघा रोग की भी चेतावनी
गांव के ही निवासी उमेश्वर सोनी बताते हैं जल सर्वे वालों कहना है कि झरने का पानी पीने ने घेंघा रोग हो सकता है. लेकिन आज तक किसी भी ग्रामीण को इस तरह की शिकायत नहीं आई है. तुर्री झरने का पानी भीषण गर्मी में लोगों के हलक को गीला कर रहा है. साथ ही इसका पानी खेती के भी काम आ रहा है. यह झरना ग्रामीणों के लिए एक वरदान है.

Tags: Chhattisgarh news, Korba news

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