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'छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हो रहा प्रयास'

'छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हो रहा प्रयास'

छत्तीसगढ़ी को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ी के प्रचार-प्रसार और राजकाज की भाषा बनाने की दिशा में भी काम चल रहा है.
प्राथमिक स्तर पर स्कूली पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का काम चल रहा है. छत्तीसगढ़ के कोरबा में आयोजित छत्तीसगढ़ राजभाषा का प्रांतीय सम्मेलन निश्चित ही छत्तीसगढ़ी के विकास व संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.

ये बातें प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री दयालदास बघेल ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के चतुर्थ प्रांतीय सम्मेलन में शुभारंभ अवसर पर कहीं. छत्तीसगढ़ी के प्रचार-प्रसार, राजकाज की भाषा बनाने व संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने के उद्देश्य से दो दिवसीय छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का चौथा प्रांतीय सम्मेलन का शुक्रवार को टीपी नगर स्थित होटल सेंटर पाइंट में शुभारंभ हुआ.

छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति, पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री दयाल दास बघेल ने प्रांतीय सम्मेलन का शुभारंभ किया. प्रांतीय सम्मेलन में साहित्यकार, कवि सहित छत्तीसगढ़ भाषा को बढ़ावा देने में विशेष योगदान देने वाले प्रबुद्घजन उपस्थित रहे. छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि प्रांतीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी के विकास, भाषा साहित्य और संस्कृति के लिखने, पढ़ने और बोलने वालों के संघर्ष की झलक देखने को मिलेगी.

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ी को राजकाज की भाषा बनाने की दिशा में काम कर रहा है. नुक्कड़ सभा लेना और गांव-गांव में आंदोलन का रास्ता अपनाना आयोग का काम नहीं है. इसके उद्देश्य को समझे बिना छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं कराया जा सकता. इस दिशा में कार्य करने के लिए उद्देश्य का पता होना जरूरी है.

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष होने के नाते छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराना मेरा पहला काम होगा. सांसद अभिषेक सिंह ने इस कड़ी में शंखनाद कर दिया है. छत्तीसगढ़ राज्य के सभी सांसदों का एक प्रतिनिधि मंडल इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेगा.

बोल-चाल और प्रशासन में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने आयोग ने काम शुरू कर दिया है. मंत्रालय और प्रशासन के कार्यालयों में छत्तीसगढ़ी से कामकाज होंगे. छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम की तैयारी भी जरूरी है. छत्तीसगढ़ी में कथा, कहानी, कविता, लोक साहित्य, लोक संस्कृति के साथ इसका इतिहास, भूगोल, समाज शास्त्र, विज्ञान और वाणिज्य का संग्रह हमारे पास नहीं है. सबसे पहले इसकी तैयारी होगी. तब जाकर इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. बिना पाठ्यक्रम बने हो हल्ला कर सरकार और आयोग को बदनाम नहीं करना चाहिए, नहीं तो छत्तीसगढ़ में अशांति फैलेगी.

छत्तीसगढ़ में ऐसे साहित्यकारों की कमी नहीं है जो छत्तीसगढ़ी में पोथी लिख दे. जो राजभाषा के विकास व कामकाज में सहयोग दे सकते है. ऐसे सभी लोगों का आयोग में स्वागत है.

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