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पीतल को सोना बताकर बैंक को लगाई लाखों रुपये की चपत, जांच शुरू

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छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसमें बैंक की मिलीभगत से 3 लोगों को लाखों रुपये का ऋण देकर उपकृत किया गया.

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यूं तो ऋण योजनाओं का लाभ देने में बैंक प्रबंधनों ने तमाम नियम कायदे बना रखे हैं. कुछ सरकारी कायदों से भी ऊपर जाकर स्वयं के नियम तय कर जरूरतमंदों को ऋण देने में जहां कोताही बरती जाती है, वहीं छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसमें बैंक की मिलीभगत से 3 लोगों को लाखों रुपये का ऋण देकर उपकृत किया गया. आभूषण ऋण के नाम से यह चपत आभूषण वैलुअर और ऋण लेने वालों ने मिलकर लगाई है.

बैंक प्रबंधक की शिकायत रामपुर पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है, मामला निहारिका-कोसाबाड़ी में संचालित इंडियन ओवरसीज बैंक का है, यहां से 3 व्यक्तियों ने अलग-अलग समय में गोल्ड लोन का लाभ उठाने नकली गहने गिरवी रखवाए, इनके इस ठग कार्य में आभूषण वैलुअर ने पूरा साथ दिया व पीतल को सोना प्रमाणित कर लाखों का ऋण दिलवाया.

यह सारा कारनामा बैंक की निहारिका-कोसाबाड़ी शाखा के पूर्व शाखा प्रबंधक देवव्रत साहू के पदस्थापना काल जून 2015 से 29 अगस्त 2018 के मध्य हुआ. बैंक से ऋण लेने बाद जब निर्धारित समय सीमा में ब्याज व कर्ज की अदायगी व सोना वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो संदेह गहराया. कर्ज लेने वालों को तलब करने पर वे सामने नहीं आए.



इस बीच शाखा प्रबंधक देवव्रत साहू का तबादला कर दिया गया. उड़ीसा प्रांत के रायगढ़ा जिले में रमनागुड़ा शाखा से स्थानांतरित कर कोरबा भेजे गए नंद किशोर बोद्रा ने 29 अगस्त 2018 को पद संभाला, उनके कार्यकाल में ऑडिट के दौरान आभूषण ऋण की यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई तो अपने स्तर पर पड़ताल और ऋण वापसी का प्रयास बाद शाखा प्रबंधक ने 12 दिसंबर 2018 को लिखित शिकायत रामपुर पुलिस चौकी में दर्ज कराई.
कर्जदार श्यामलेन्दु मृधा, श्यामल दास और मुलता दास आभूषण के वैलुअर सराफा कारोबारी अनूप मजूमदार के खिलाफ अपराध दर्ज करने बाबत् आवेदन दिया गया है. शाखा प्रबंधक ने बताया कि 12 दिसंबर 2018 को शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अभी तक एफ आई आर दर्ज नहीं हुआ. हालांकि पुलिस ने जांच शुरू कर उनका बयान जरूर दर्ज किया है.

सूत्रों की मानें तो इंडियन ओवरसीज बैंक प्रबंधन द्वारा कर्जदारों की ओर से कर्ज की अदायगी व ब्याज का भुगतान नहीं करने के बाद उनके द्वारा जमा आभूषण की नीलामी से वसूली का प्रयास विगत दिनों किया गया. करीब 5 तोला वजनी सोना की सरकारी कीमत 1 लाख 5 हजार के करीब आंकी गई. जब इस नीलामी में शामिल होने पहुंचे कुछ सोनारों ने सोना देखा तो शक हुआ. महज 60 से 70 हजार कीमती सोना की सरकारी दर पर 1 लाख से अधिक होने पर माथा ठनका और दंग रह गए, जब 5 तोला सोना में मात्र 2-3 तोला ही सही सोना मिलाए शेष पीतल मिला था.
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