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इस बार राजस्व वसूली में पिछड़ा कोरबा का खनिज विभाग, हर बार रहता था अव्‍वल

इस बार राजस्व वसूली में पिछड़ा कोरबा का खनिज विभाग, हर बार रहता था अव्‍वल

राजस्व वसूली के मामले में अव्वल रहने वाला छत्तीसगढ़ के कोरबा का खनिज विभाग इस साल अपने लक्ष्य से पीछे है. दरअसल, कोरबा राजस्व वसूली मामले में 14 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला पहला जिला माना जाता है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य से हमेशा से ज्यादा राजस्व देने वाला कोरबा का खनिज विभाग इस बार अपने लक्ष्य से पिछड़ गया है.

राजस्व वसूली के मामले में अव्वल रहने वाला छत्तीसगढ़ के कोरबा का खनिज विभाग इस साल अपने लक्ष्य से पीछे है. दरअसल, कोरबा राजस्व वसूली मामले में 14 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला पहला जिला माना जाता है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य से हमेशा से ज्यादा राजस्व देने वाला कोरबा का खनिज विभाग इस बार अपने लक्ष्य से पिछड़ गया है.

राजस्व वसूली के मामले में अव्वल रहने वाला छत्तीसगढ़ के कोरबा का खनिज विभाग इस साल अपने लक्ष्य से पीछे है. दरअसल, कोरबा राजस्व वसूली मामले में 14 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला पहला जिला माना जाता है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य से हमेशा से ज्यादा राजस्व देने वाला कोरबा का खनिज विभाग इस बार अपने लक्ष्य से पिछड़ गया है.

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राजस्व वसूली के मामले में अव्वल रहने वाला छत्तीसगढ़ के कोरबा का खनिज विभाग इस साल अपने लक्ष्य से पीछे है. दरअसल, कोरबा राजस्व वसूली मामले में 14 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला पहला जिला माना जाता है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य से हमेशा से ज्यादा राजस्व देने वाला कोरबा का खनिज विभाग इस बार अपने लक्ष्य से पिछड़ गया है.

ज्ञात हो कि खनिज विभाग को सबसे ज्यादा राजस्व कोयला खदानों से मिलता है जिसमें कोरबा खनिज विभाग को 14 सौ 55 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया था. लेकिन विभाग अबतक केवल 40 करोड़ रुपए का ही राजस्व वसूल कर सका है.

कोरबा के खनिज अधिकारी डॉ. डी.के. मिश्रा ने औसतन एक हजार चालीस करोड़ रुपए राजस्व मिलने की संभावना जताई है. खनिज अधिकारी का कहना है कि पॉवर सेक्टर को कोयला दिए जाने के कारण उन्हें इस बार ज्यादा राजस्व नहीं मिल पाया है.

खनिज अधिकारी डॉ. मिश्रा ने कहा कि पॉवर सेक्टर के कोयले का जो रेट होता है वो उन्हें 40 प्रतिशत कम मिलता है, जबकि जितना पिछले साल उत्पादन किया गया था उतना ही इस साल भी किया गया है. लेकिन कीमत कम होने के कारण उन्‍हें पिछली बार से भी कम राजस्व मिल रहा है.

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