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वेतन नहीं बढ़ने पर SECL के 400 से भी ज्यादा कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर गए

वेतन नहीं बढ़ने पर SECL के 400 से भी ज्यादा कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर गए
वेतन नहीं बढ़ने पर SECL के 400 से भी ज्यादा कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर गए

कंपनी पॉलिसी के मुताबिक तमाम कर्मचारियों का वेतन बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन कंपनी के अफसर कर्मियों को गुमराह कर रहे हैं. वेतन वृद्धि करना तो दूर उन्हें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया है.

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छत्तीसगढ़ में कोरबा जिले के एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में ओवर बर्डन का काम करने वाली बीजीआर कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है. कंपनी पॉलिसी के मुताबिक तमाम कर्मचारियों का वेतन बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन कंपनी के अफसर कर्मियों को गुमराह कर रहे हैं. वेतन वृद्धि करना तो दूर उन्हें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया है. इस बात से नाराज करीब 400 से भी ज्यादा कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर चले गए हैं.

दरअसल, एसईसीएल की कोयला खदानों में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा काम किया जा रहा है. इसके लिए स्थानीय कर्मचारी और मजदूरों को नियोजित किया गया है, लेकिन उन कर्मचारियों को सुविधा मुहैया कराने में कोताही बरती जा रही है.

लिहाजा, कुसमुंडा खदान में ओवर बर्डन का काम करने वाली बीजीआर कंपनी के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है. उनका आरोप है कि कंपनी द्वारा नियम के तहत वेतन नहीं दिया जा रहा है और अन्य कंपनियों द्वारा समय के अनुरूप कर्मचारियों का वेतन वृद्धि कर दिया जाता है. वहीं बीजीआर कंपनी के अफसर अपने कर्मचारियों को सिर्फ गुमराह कर रहे हैं.



बीजीआर कंपनी में डोजर ऑपरेटर क्रेन ऑपरेटर वर्तमान मशीनों के संचालक कंपनी के इस रवैये से परेशान हैं. कई बार कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर प्रबंधन से पत्राचार भी किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. अब वे आर-पार की लड़ाई के मूड में है यही वजह है कि कंपनी के कर्मचारी लामबंद होकर पिछले 24 घंटे से काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं, बीजीआर कंपनी पिछले डेढ़ साल से खदान में काम कर रही है प्रारंभ से ही कंपनी द्वारा मजदूरों का शोषण किया जा रहा है वेतन वृद्धि तो दूर अपने कर्मचारियों को मूलभूत सुविधा देने में भी कंपनी कोताही बरत रही है.
हैरानी की बात तो यह है कि पिछले दिनों में कंपनी द्वारा शौचालय का निर्माण किया गया था, लेकिन उस पर भी अब ताला जड़ने के साथ ही दरवाजे पर वेल्डिंग कर दिया गया है. अब तो कर्मचारियों को लघु शंका व शौच के लिए खुले मैदान में जाना पड़ता है. मेहनतकश कर्मचारी किसी तरह इस समस्या का सामना तो कर लेते हैं, लेकिन वेतन नहीं मिलने से उनकी माली हालत खराब होती जा रही है.

हड़तालियों ने साफ कर दिया है कि जब तक कंपनी उनके खाते में बढ़ी हुई वेतन की राशि जमा नहीं करती, तब तक वे हड़ताल पर रहेंगे.

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