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जांजगीर में मजाक बनकर रह गई राष्ट्रीय बालिका प्रोत्साहन योजना

जांजगीर में मजाक बनकर रह गई राष्ट्रीय बालिका प्रोत्साहन योजना

Photo Credit : Getty Image

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की आठवीं से ऊपर पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय बालिका प्रोत्साहन योजना अब मजाक बनकर रह गई है.

    छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की आठवीं से ऊपर पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय बालिका प्रोत्साहन योजना अब मजाक बनकर रह गई है.

    जांजगीर जिले में बीते आठ सालों के दौरान 24 हजार 176 बालिकाओं ने प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन किया है. इसके तहत विभाग की ओर से महज 210 बालिकाओं को ही योजना के तहत लाभान्वित किया गया है, जबकि आवंटन के अभाव में 23 हजार 966 बालिकाएं इस योजना का लाभ पाने की कतार में खड़ी हैं.

    केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की बालिकाओं के लिए वर्ष 2008-09 में राष्ट्रीय बालिका प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का प्रमुख उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना था.

    इसके तहत आठवीं की पढ़ाई के बाद 9वीं और 10वीं में पढ़ने वाली बालिकाओं को प्रोत्साहन स्वरूप तीन सौ रुपए प्रतिमाह के हिसाब से राशि 12वीं क्लास की पढ़ाई पूरी करते समय तक देनी थी. इसके लिए इच्छुक छात्राओं के आवेदन पर बकायदा खाते खुलवाए गए और उसमें राशि डालने की बात कही गई.

    शुरुआती दिनों में ही माह वार राशि नहीं आने पर 3600 रुपए प्रति छात्रा के हिसाब से वर्ष में एक बार भुगतान का कार्यक्रम बनाया गया. लेकिन इसमें भी छात्राओं को निराशा ही हाथ लगी. पिछले आठ सालों से बालिकाओं को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है. वहीं इस वर्ष भी अधिकारियों की लापरवाही के चलते फॉर्म जमा नहीं किए जा सके हैं.

    जिला शिक्षा अधिकारी जी.पी. भास्कर के मुताबिक, फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर थी जो अब खत्म हो चुकी है. ऐसे में अब शिक्षा विभाग जांच टीम गठित कर राज्य शिक्षा विभाग की मदद से केन्द्र शासन से राशि आवंटन की मांग करने की बात कह रहा है.

    Tags: Janjgir news

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