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अब कोरबा के लोगों को भी कम कीमत पर मिलेंगी दवाइयां

अब कोरबा के लोगों को भी कम कीमत पर मिलेंगी दवाइयां

रेडक्रॉस द्वारा संचालित जेनेरिक दवाइयों की दुकान.

रेडक्रॉस द्वारा संचालित जेनेरिक दवाइयों की दुकान.

शहर में दो जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. इनमें से एक सीतामणी रोड पर और दूसरा जिला अस्पताल परिसर में स्थित है.

    छत्‍तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिले कोरबा में गरीब मरीजों को ब्रांडेड से कई गुना कम कीमत में जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. शहर में दो जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. इनमें से एक सीतामणी रोड पर और दूसरा जिला अस्पताल परिसर में स्थित है. इन
    केंद्रों में ब्रांडेड दवाइयों के सामान्तर जेनेरिक दवाइयां कई गुना कम कीमत पर मिलेंगी.

    कुसमुंडा निवासी सुशील विश्वकर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार पूरे देश में लोगों को सस्ती जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए हर विकासखंड में प्रधानमंत्री जन औषधि‍ केंद्र खोल रही है. ऐसे केंद्रों में किसी भी बीमारी की दवा ब्रांडेड की तुलना में कई गुना कम कीमत पर मिलती है. इससे आम व गरीब मरीजों के लिए इलाज के दौरान दवाइयों की खरीदी पर आर्थिक बचत मिलती है. खासकर बीपी, शुगर समेत अन्य गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए जेनेरिक दवाइयां बड़ी राहत दिलाती हैं.

    डीपीएम पद्माकर शिंदे ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जेनेरिक दवाइयां ही उपलब्ध कराई जा रही हैं. कोरबा शहर के अलावा कटघोरा, करतला और पाली में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं. उन्‍होंने बताया कि जेनेरिक दवाइयां भी ब्रांडेड दवाइयों के समान ही पूरी तरह प्रभावी होती हैं.

    वर्तमान में सभी तरह की बीमारियों के लिए करीब 300 प्रकार की जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन प्राइवेट अस्‍पतालों के डॉक्टरों के ब्रांडेड दवाइयां लिखने की वजह से जेनेरिक दवाइयों के खरीदारों में इजाफा नहीं हो रहा है. जो ग्राहक ब्रांडेड दवाई की पर्ची लेकर आते हैं, उन्हें इंटरनेट से सर्च करके
    समान फार्मूला की जेनेरिक दवाई उपलब्ध कराई जाती है. दरअसल कई डॉक्टर कमीशन और गिफ्ट के चक्कर में मरीजों को ब्रांडेड कंपनि‍यों की दवाइयां लिखते हैं.

    कई लोग अब भी वंचित
    जेनेरिक दवाइयों के लाभ से अब भी शहर में हजारों लोग वंचित हो रहे हैं. जन औषधि केंद्र इतनी दूर हैं कि शहर के एक छोर से दूसरे छोर की ओर जाना पड़ता है. शहर में निहारिका और कोसाबाड़ी क्षेत्र में बड़े व छोटे निजी अस्पताल संचालित हो रही हैं. यहां 40 से ज्यादा मेडिकल दुकानें हैं, इसलिए इन क्षेत्रों को मेडिकल हब कहा जाने लगा है, लेकिन मरीजों को सरल व सहज तरीके से सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए इस क्षेत्र में जन औषधि केंद्र नहीं है. इस कारण मरीज चाहकर भी जेनेरिक दवाइयां नहीं खरीद पाते हैं.

    Tags: Generic medicines, Jan Aushadhi initiative

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