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कोरबा में 1400 साल पुराना है ये पेड़, शुभ काम से पहले होती है इसकी पूजा

छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक ऐसा पेड़ है जो 1400 वर्ष से अधिक आयु का है. ग्रामीण पेड़ों को देवता मानते हैं.
छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक ऐसा पेड़ है जो 1400 वर्ष से अधिक आयु का है. ग्रामीण पेड़ों को देवता मानते हैं.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कोरबा (Korba) में एक ऐसा पेड़ है जो 1400 वर्ष से अधिक आयु का है. ग्रामीण इस पेड़ को देवता (God) मानते हैं.

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कोरबा. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कोरबा (Korba) में एक ऐसा पेड़ है जो 1400 वर्ष से अधिक आयु का है. यहां के लोग इस पेड़ को देवता (God) मानते हैं. ग्रामीणों को प्रकृति (Nature) से इतना लगाव है कि गांव में 1400 साल पुराना साल का यह पेड़ आज भी हरा भरा है. गांव वाले विवाह के साथ ही कोई भी शुभ कार्य करने के पहले इस वृक्ष (Tree) की पूजा करते हैं. वन विभाग ने इस वृक्ष को संरक्षित घोषित करते हुए चबूतरा बनकर पेड़ से जुड़ी जानकारी का बोर्ड लगाया है. साथ ही इसे नुकसान न पहुंचाने की चेतावनी भी दी गई है.

कोरबा (Korba) जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित बालको वन परिक्षेत्र में आने वाले सतरेंगा (Satarenga) में साल के एक पेड़ को संरक्षित किया गया है. पादप वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक परीक्षण के बाद इसकी उम्र की पुष्टि की है, जो भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे पुराने साल के जीवित पेड़ों में से एक है.

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पेड़ के पास लगाया गया बोर्ड.




साल 2006 में खोजा गया था ये पेड़
कोरबा के इस साल के पेड़ की खोज ‌वर्ष 2006 में हुई थी. तत्कालीन डीएफओ अरुण पाण्डेय ने इसका परीक्षण कराया, जिसमें इसकी उम्र 1400 साल से अधिक पाई गई. देहरादून स्थित वानिकी प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए परीक्षण में भी इसकी उम्र की पुष्टि की गई है. महापेड़ की ऊंचाई 28 मीटर से अधिक है. जमीनी सतह पर गोलाई 28 फिट 2 इंच है.

ग्रामीण मानते हैं भगवान
इस सालके  पेड़ के जीवित होने का श्रेय सतरेंगा के ग्रामीणों को दिया जाता है. ग्रामीण इसे ठाकुर देवता मानते हैं. ग्राम पंचायत सतरेंगा के ग्रामीण बंधन सिंह बताते हैं कि गांव में काफी पहले से ही हरे-भरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध है. जरूरत पड़ने पर सूखे पेड़ों को ही काटते हैं. वृक्ष हमें जीवन दे रहे हैं. इसी से अच्छी बारिश होती है. गांव खुशहाल है. वनोपज ही हम लोगों की जीविका का साधन है. साल के इस पेड़ को हम भगवान के रूप में पूजते हैं.

संरक्षण की जरूरत
कोरबा के शासकीय पीजी कॉलेज के वनस्पति शास्त्र के प्रोफेसर संदीप शुक्ला बताते हैं कि दुनिया में हजार वर्ष पुराने जीवित पेड़ अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं. एरीजोना, अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टकसन में स्थित लेबोरेटरी ऑफ ट्री रिंग रिसर्च (एलटीआरएस) यह काम करती है. यह डेंड्रोक्रोनोलॉजी यानी पेड़ों की उम्र को निर्धारित करने की आधुनिक विधि की विश्वस्तरीय संस्था है. कोरबा के सतरेंगा गांव में 1400 वर्ष से अधिक पुराना साल पेड़ ना सिर्फ़ लोगो को जीवन के लिए ऑक्सीजन दे रहा है. बल्कि ग्लोबल वर्मिंग के इस दौर में पानी के साथ पेड़ों के संरक्षण करने की जरूरत बता रहा है.

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