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दिव्यांग मतदाताओं के लिए खरीदी गई व्हीलचेयर में घोटाला

मतदान केंद्रों में दिव्यांग मतदाताओं के लिए खरीदी गई व्हीलचेयर में घोटाला

दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों में खरीदी जा रही व्हीलचेयर में बड़ा घोटाला सामने आया है. कोरबा कलेक्टर जांच कर कार्रवाई की बात कही है.

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नगर पालिक निगम में भ्रष्टाचार के बाद अब दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान को सुगम बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों में व्हीलचेयर खरीदी में घोटाला सामने आया है.

दरअसल, कोरबा में विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद दिव्यांग मतदाताओं के लिए ग्राम पंचायतों में 2-2 व्हीलचेयर की खरीदी की गई है. एक की कीमत 6 हजार 900 रुपए है. साथ ही 500-500 रुपए ट्रांसपोर्ट चार्ज भी लेना बताया गया है.

मामले में जोगी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शिव अग्रवाल ने कहा कि जिले में 392 पंचायत हैं, जहां दो-दो व्हीलचेयर की खरीदी की गई है. इसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं है. बाजार से अच्छी गुणवत्ता के व्हीलचेयर  की कीमत 3500 रुपए तक है, लेकिन जिस कंपनी से खरीदना बताया गया है वह रजिस्टर्ड नहीं है. साथ ही एक व्हीलचेयर की कीमत 7 हजार और 8 हजार में खरीदना बताया जा रह है.

उन्होंने कहा कि इसकी खरीदी में गड़बड़ी की गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. व्हीलचेयर का उपयोग चुनाव के समय ही किया जाएगा. इसके लिए पंचायत के 14वें वित्त, मूलभूत या मनरेगा से भुगतान करने का निर्देश जनपद पंचायत द्वारा जारी किया गया है. इसकी खरीदी जनपद पंचायत कोरबा के साथ करतला, कटघोरा, पाली और पोड़ी-उपरोड़ा में की गई है, जो कोटेशन बताया गया है वो ट्रेड एंड ट्रेड कॉर्पोरेशन नामक दुकान का है.

इधर, व्हीलचेयर की खरीदी के सवाल पर कोरबा जनपद पंचयत सीईओ प्रीति पावर का कहना है कि निर्वाचन शाखा से पत्र आया था, जिसे ग्राम पंचायत सचिवों को भेजा गया है. उन्होंने कहा कि जनपद से खरीदी नहीं की गई है. हालांकि इसकी शिकायत मिलने पर उन्होंने जांच करने की बात कही है. वहीं जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सरपंच और सचिवों के कंधे पर डालकर अपना पलड़ा झड़ने में लगे हैं.

इस मामले में कोरबा कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक़ ने बताया कि जिले में 4 हजार से अधिक दिव्यांग मतदाता हैं. किस मतदान केंद्र में कितने दिव्यांग मतदाता हैं इसका पता लगाकर, जहां जरूरी है वहीं व्हीलचेयर की व्यस्था की जाएगी.

बहरहाल, बड़ा सवाल यह है कि अगर जिन मतदान केंद्रों में दिव्यांग मतदाता ही नहीं हैं, वहा व्हीलचेयर की खरीदी क्यों की जा रही ? ऐसे में व्हीलचेयर खरीदी में खोटाले की बात से इंकार नहीं किया जा सकता.

 

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