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'साहित्यकार, कलाकार और फिल्मकारों ने छत्तीसगढ़ी को बनाया राजभाषा'

'साहित्यकार, कलाकार और फिल्मकारों ने छत्तीसगढ़ी को बनाया राजभाषा'

प्रसिद्ध साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण जरूरी है. छत्तीसगढ़ी का बिना मानकीकरण हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा सकता.

प्रसिद्ध साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण जरूरी है. छत्तीसगढ़ी का बिना मानकीकरण हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा सकता.

प्रसिद्ध साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण जरूरी है. छत्तीसगढ़ी का बिना मानकीकरण हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा सकता.

छत्तीसगढ़ मां कौशिल्या की जन्मभूमि है. भगवान राम का ननिहाल है. छत्तीसगढ़ी मां कौशिल्या भी बोलती थी छत्तीसगढ़ी में मिठास है. छत्तीसगढ़ के साहित्यकार, कलाकार और फिल्मकारों ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाया है.

ये बातें संत पवन दीवान ने सेंटर पाइंट हॉटल में आयोजित दो दिवसीय छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के चौथे प्रांतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा. संत पवन दीवान ने कहा कि अब हम सबको मिल जुलकर छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने प्रयास करना होगा. हम सबके प्रयास से ही आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी को स्थान मिलेगा.

प्रसिद्ध साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण जरूरी है. छत्तीसगढ़ी का बिना मानकीकरण हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा सकता. छत्तीसगढ़ी के मानकीकरण का काम चल रहा है. जल्द ही छत्तीसगढ़ी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो जाएगा, ऐसा हम मान सकते हैं.

दो दिवसीय राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन के दूसरे दिन सुबह 8 बजे से पांचवा सत्र हुआ, जिसमें राजकाज की भाषा छत्तीसगढ़ी विषय पर विचार मंथन किया गया. इसकी अध्यक्षता राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने की. मंच संचालन सुधीर शर्मा ने किया. इस सत्र में प्रमुख वक्ता गणेश कौशिक, नगर निगम रायपुर उपआयुक्त डॉ. जेआर सोनी रहे.

इसके अलावा जागेश्वर प्रसाद, अशोक तिवारी, लाल राम कुमार सिंह, डॉ. सोमनाथ यादव, डॉ. संतराम देशमुख व गणेश सोनी प्रतीक ने चर्चा का क्रम जारी रखा. छत्तीसगढ़ी को राजकाज की भाषा में शामिल किए जाने पर विचार मंथन करते हुए इसकी समस्याओं सुविधाओं और बारीकियों पर अपने विचार रखे.

छठवां सत्र यानी सम्मेलन के समापन सत्र में छत्तीसगढ़ी साहित्य विषय पर खुला अधिवेशन हुआ. जिसकी अध्यक्षता डॉ. महादेव पांडेय ने की. मंच का संचालन डॉ. परदेशी राम वर्मा, आधार आलेख गणेश यदु ने पेश किया. समापन सत्र के वक्ता के रूप में सरला शर्मा, शकुंतला शर्मा, डॉ. अनुसुइया अग्रवाल, डॉ. निरूपमा शर्मा, शशिकला दुबे और हंसा शुक्ला ने व्यक्तव्य पेश किया.

Tags: Chhattisgarh news

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