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कोरिया: सरकारी भवनों को भगवा रंग देने में जुटा प्रशासन

जिला अस्पताल के नए भवन को चारों ओर से भगवामय किया गया
जिला अस्पताल के नए भवन को चारों ओर से भगवामय किया गया

कोरिया जिला प्रशासन अब सरकारी भवनों को भगवा रंग देने में जुटा हुआ है. जिला अस्पताल और उससे लगे नए और पुराने सभी भवनों को भगवा रंग से भगवामय कर दिया गया है.

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छत्तीसगढ़ में कोरिया जिला प्रशासन अब सरकारी भवनों को भगवा रंग देने में जुटा हुआ है. जिला अस्पताल और उससे लगे नए और पुराने सभी भवनों को भगवा रंग से भगवामय कर दिया गया है. जिला अस्पताल के प्रभारी सीएस डॉ. एस. के. गुप्ता का कहना है कि रंग का चयन हम सबने मिलकर तय किया था.

इधर, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह छोटू ने प्रशासन पर बीजेपी के लिए काम करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बीजेपी के कार्यक्रम में भीड़ इकट्ठा करना हो या उनके कार्यकर्ताओं को उपकृत करने का काम हो, प्रशासन ने हर तरह की मदद के लिए डीएमएफ का खजाना खोल रखा है. इस दौरान इसकी कोई जांच नहीं की जाती है. उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी को विधानसभा चुनाव से हटाने के लिए वे चुनाव आयोग को पत्र लिखेंगे. ताकि निष्पक्ष चुनाव कराया जा सके.

जानकारी के मुताबिक जिले में डीएमएफ की राशि का बंदरबांट थमने का नाम नही ले रहा है. प्रशासन द्वारा डीएमएफ के राशि के विरुद्ध मिली शिकायतों पर किसी भी तरह की जांच कर कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है. दूसरी तरफ अब प्रशासन सरकारी भवनों को भगवामय करने में लगा है. इसकी शुरुआत जिला अस्पताल से की गई है.



जिला अस्पताल के नए भवन को चारों ओर से भगवामय कर दिया गया है. वहीं इससे लगे नेत्र विभाग का भवन, पुराने अस्पताल भवन को भी भगवा रंग में कर अपने को बीजेपी के करीबी बताने में अफसर पीछे नहीं हैं.
बीते चार माह से जिला अस्पताल में रंग का कार्य चल रहा था, जो अब पूरा कर लिया गया है. हलांकि अस्पताल प्रबंधन रंग के चयन को लेकर पीडब्ल्यूडी और सभी के अफसरों की राय बता रहा है, लेकिन जिला प्रशासन को इस रंग के बारे में खबर न हो ऐसा हो ही नहीं सकता. आपको बता दें कि बीते कुछ ही माह पहले कायाकल्प योजना के तहत जिला अस्पताल को सफेद रंग से रंगवाया गया था. उसके बाद फिर अचानक डीएमएफ से 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत कर जिला अस्पताल को भगवा रंग से रंग डाला.

वहीं भरतपुर के तहसील मुख्यालय जनकपुर के 100 बेड वाले अस्पताल में भी रंगाई-पुताई का काम जोरों पर है. सूत्रों की मानें तो डीएमएफ से यहां निचले तल की पुताई के लिए 11 लाख जबकि ऊपरी तल के लिए 8 लाख रुपए की राशि जारी की गई है. दोनों काम बिना टेंडर के जारी हुआ है. अभी अंदर की पुताई का काम चल रहा हैं.

वहीं राज्य के खनिज सचिव के स्पष्ट निर्देश के बाद भी डीएमएफ की जानकारी वेबसाईट पर अपलोड नहीं की जा रही है. दरअसल, बेधड़क मनमर्जी से करोड़ों रुपए के कार्य की स्वीकृत कर दिए गए हैं. लोगों को इस बात की जानकारी न हो इसके लिए स्वीकृत कार्यों को छुपाया जा रहा है.

वहीं कोरिया की वेबसाईट पर 3 जून 2017 का पत्र पोस्ट कर यह बताया गया है कि अप्रैल 2017 तक के स्वीकृत कार्यों की सूची उपलब्ध है, लेकिन सूची में सिर्फ मार्च 2017 तक के ही स्वीकृत कार्यों की सूची है. वर्ष 2017-18 में अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक के स्वीकृत कार्यों की सूची अब तक वेबसाईड पर अपलोड नहीं की गई है.
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