ये हैं छत्तीसगढ़ के भागीरथ, पानी नहीं था तो अकेले खोद डाला तालाब

गंगा को मुक्त कराने वाले भागीरथ को तो सभी जानते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के श्यामलाल ने जल संरक्षण के लिए अपने दम पर तालाब खोद दिया.

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 26, 2017, 10:53 PM IST
ये हैं छत्तीसगढ़ के भागीरथ, पानी नहीं था तो अकेले खोद डाला तालाब
Shyamlal of Chhattisgarh dug pond on water for water conservation
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Updated: August 26, 2017, 10:53 PM IST
भगवान शिव की चोटी से गंगा को धरती पर लाने वाले भागीरथ को तो सभी जानते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में भी एक शख्स ऐसा है, जिसने जल संरक्षण के लिए अपने दम पर तालाब खोद दिया.

मंजिल पाने का जुनून, उसे पूरा करने का हौसला और ईमानदारी से की गई मेहनत कभी विफल नहीं होती. यह कहावत छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के नगर पालिक निगम चिरमिरी क्षेत्र के श्यामलाल पर सटीक बैठती है.

चिरमिरी के वार्ड नंबर-1 में रहने वाले श्यामलाल ने अपने इलाके में पानी की समस्या को देखते हुए 27 सालों में वह कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.



श्यामलाल ने अपने दम पर रोज मेहनत कर एक तालाब खोद डाला. वर्तमान में यह तालाब जहां आम लोगों के निस्तार के काम आ रहा है. वहीं मवेशियों के लिए भी यह तालाब जीवनदायी साबित हो रहा है.

नगर पालिक निगम चिरमिरी का साजापहाड़ क्षेत्र कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है. यहां न तो आने-जाने के लिए सड़क है, न बिजली और न ही पानी का उचित प्रबंध है.

ऐसे में यहां रहने वाले लोगों की समस्या का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. इसी गांव में रहने श्यामलाल ने जब देखा कि गांव में पानी की काफी किल्लत है, खासकर जब वह जंगल में मवेशी चराने के लिए जाता तो मवेशियों को भी पीने का पानी नहीं मिल पाता.

महज पन्द्रह साल की उम्र में श्यामलाल ने एक संकल्प लिया. इसके तहत उसने क्षेत्र में एक तालाब निर्माण करने की ठानी. वह रोज जंगल में मवेशी चराने के लिए आता और उसके साथ ही उसने तालाब निर्माण भी शुरू कर दिया.
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पहले तो गांव के लोग उसे रोज जंगल में मजदूरी करते देख हंसते, उसे पागल कहते थे, लेकिन बिना लोगों की परवाह किए श्यामलाल अकेले ही लगा रहा.

दिन बीते, कई महीने बीत गए , साल बीत गए लेकिन श्यामलाल ने हिम्मत नहीं हारी. आखिरकार 27 सालों की मेहनत के बाद श्यामलाल ने अपनी मंजिल हासिल कर ली. श्यामलाल ने साजा पहाड़ गांव में एक तालाब का निर्माण अकेले ही कर डाला.

स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल बताते हैं कि स्थानीय लोगों से उन्हें श्यामलाल द्वारा तालाब खोदने की जानकारी मिली. इसके बाद वे साजा पहाड़ पहुंचे और श्याम लाल सहित अन्य ग्रामीणों से मुलाकात की.

विधायक जब साजा पहाड़ पहुंचे तो पता चला कि श्यामलाल तालाब खोदने गया है. फिर विधायक भी वहां पहुंचे. विधायक ने श्यामलाल की कार्य सराहना की और उसे हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया. विधायक ने श्यामलाल को अपने स्वेच्छा अनुदान निधि से दस हजार रुपए देने की भी घोषणा की.

श्यामलाल का कहना है कि उसने यह सब गांव के लिए किया है. 27 साल की मेहनत के बाद अब इसका लाभ लोगों को मिलेगा. श्यामलाल ने कहा कि इन 27 सालों में किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली. अब खुद विधायक उसके काम को देखने यहां पहुंचे हैं. देर ही सही कोई तो यहां पहुंचा.
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