पानी की कहानी: पहाड़ से पानी उतारने के लिए आदिवासियों का अनोखा जुगाड़
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पानी की कहानी: पहाड़ से पानी उतारने के लिए आदिवासियों का अनोखा जुगाड़
Water issue in Hamirpur

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक आदिवासी गांव के लोग पानी की कीमत बखूबी समझते हैं. इसलिए ही वे बूंद-बूंद पानी सहेजने का काम करते हैं.

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न्यूज18 हिंदी की खास मुहिम पानी की कहानी में हम आपको देश में पानी के मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दे रहे हैं. इस कड़ी  में हम बता रहे हैं कि कैसे छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक आदिवासी गांव ने अपनी पानी की जरूरत को पूरा करने का जिम्मा खुद उठा लिया. पहाड़ से पानी लाने के लिए उन्होंने खुद लकड़ी की पाइपलाइन तैयार की और गांव के नजदीक पानी पहुंचाया. पढ़िए गांव वालों के इस जज्बे को बयां करती यह कहानीः 

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक आदिवासी गांव के लोग पानी की कीमत बखूबी समझते हैं. इसलिए ही वे बूंद-बूंद पानी सहेजने का काम करते हैं. क्योंकि मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल पीने का पानी यहां आसानी से नहीं मिलता. इसके लिए उन्हें पहाड़ की चोटियों से पानी नीचे उतारना पड़ता है. पहाड़ से पानी भरकर लाने में उन्हें दिक्कत न हो इसलिए उन्होंने अनोखा जुगाड़ बनाया है.

कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम पंचायत बेलिया का आश्रित ग्राम पलारीडांड़ है. यहां के ग्रामीणों ने अथक मेहनत कर पहाड़ की चोटी पर स्थित जल स्रोत के पानी को लकड़ी की पाइपलाइन बनाकर गांव के पास तक लाया है. इस आदिवासी बाहुल्य गांव के लोग इसी लकड़ी की पाइप लाइन के बदौलत पीने का पानी का जुगाड़ कर पाते हैं.



दरसल सोनहत विकासखण्ड के वनांचल ग्राम पलारीडांड जो चारों ओर से जंगलो व दोनों ओर से पहाड़ों से घिरा है.
यहां लगभग 20 से 25 परिवार निवास करते हैं. इस गांव तक पहुचने के लिए अच्छी सडक नहीं बन पाई है. किसी को यहां पहुंचना है तो केवल निजी वाहन से ही पहुंच सकता है.



ग्राम पलारीडांड में सबसे ज्यादा समस्या पेयजल की है. गांव में किसी के यहां कुआं भी नही हैं. गांव में एकमात्र सरकारी हैंडपंप है, जिसमें सोलर सिस्टम लगाया गया है, लेकिन इसमें भी कुछ खराबी आ जाने के कारण यहां पर लोगों को पेयजल नहीं मिल पाता है. वहींं दूसरी ओर गांव के स्कूल एवं आंगनबाड़ी के पास ही 3 हैंडपंप खनन किया गया, लेकिन पानी नहीं निकला.

गांव के अधिकांश लोग बगल के ग्राम तंजरा में पेयजल के लिए जाते हैं जो पलारीडांड़ से लगभग 3 किलोमीटर दूर है. ग्रामीणों की माने तो वर्तमान में लोग वहीं से पीने का पानी लाया करते है, जिसके सहारे कुछ लोग पानी भरते है. भूजल से सूखी ग्राम पलारीडांड की धरती और वहां के ग्रमीण भले ही अपना स्वंय का कुआं व अन्य साधन के लिए तरस रहे हों, लेकिन प्रकृति ने उन्हें पेयजल के लिए अनुपम उपहार प्रदान किया है.

गांव से लगे पहाड़ के बीच से एक तुर्रा है, जहां से मीठी जलधारा अनवरत बहती रहती है.
इस जल स्रोत के अलावा ग्राम में दूसरा कोई जल स्रोत उपलब्ध नहीं है. जब ग्रामीण पेय जल के लिए शासन प्रशासन से बार बार मांग करके थक गए. तब अंतत: ग्रामीणों ने स्वयं की मेहनत कर पहाड़ की चोटी पर स्थित जल स्रोत के पानी को लकड़ी की पाइपनुमा आकृति में काट कर एक पाइपलाअन बनाई. लकड़ी के खंभों को ही बीच में पिलर की तरह सर्पोट देकर पानी को नीचे लाया. इस जुगाड़ के बाद यहां पर अनावरत पानी पहुंच रहा है.

इस जुगाड़ के पाइपलाइन से मिलने वाले पानी को ग्रामीण पीने के लिए अपने घरों पर ले जाया करते हैं. हलांकि इस पानी को घर तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को 1 से 2 किलोमीटर की दूरी तय करनी ही पड़ती है. बहरहाल लकड़ी की पाइपलाइन से पानी की पतलीधार लोगों की प्यास जरूर बुझा रही है, लेकिन ग्रामीणों को इसमें पानी भरने में काफी समय लगता है.

कोरिया कलेक्टर नरेन्द्र कुमार दुग्गा का कहना है कि गांव में पानी की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. पहाड़ों के बीच बसे होने के कारण संसधान पहुंचाने में थोड़ी दिक्कत हो रही है, लेकिन जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा.

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