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इस मंदिर में भक्‍तों से बातें करते हैं भगवान!

इस मंदिर में भक्‍तों से बातें करते हैं भगवान!

माता और भक्तों के बिच संवाद का अनोखा तरिका। भक्त माता से कहते हैं अपनी सिधी बात, माता भी भक्तों की फरियाद पड़ लेती है, और उनकी मनोकमाना पुरी करती है। बात अचरजपुर्ण है, पर सत्य है। जांजगीर चांपा जिले के खोखरा में विराजित मां मनका दाई मंदिर के दिवालों पर हजारों की संख्या में भक्त अपनी बात, मनोकामना लिखकर माता से वार्तालाप करते हैं। माता उनकी फरियाद को पुरी करती है, यही वजह है कि अब दिनोंदिन दिवाल पर संदेशो की संख्या बड़ती जा रही है।

माता और भक्तों के बिच संवाद का अनोखा तरिका। भक्त माता से कहते हैं अपनी सिधी बात, माता भी भक्तों की फरियाद पड़ लेती है, और उनकी मनोकमाना पुरी करती है। बात अचरजपुर्ण है, पर सत्य है। जांजगीर चांपा जिले के खोखरा में विराजित मां मनका दाई मंदिर के दिवालों पर हजारों की संख्या में भक्त अपनी बात, मनोकामना लिखकर माता से वार्तालाप करते हैं। माता उनकी फरियाद को पुरी करती है, यही वजह है कि अब दिनोंदिन दिवाल पर संदेशो की संख्या बड़ती जा रही है।

माता और भक्तों के बिच संवाद का अनोखा तरिका। भक्त माता से कहते हैं अपनी सिधी बात, माता भी भक्तों की फरियाद पड़ लेती है, और उनकी मनोकमाना पुरी करती है। बात अचरजपुर्ण है, पर सत्य है। जांजगीर चांपा जिले के खोखरा में विराजित मां मनका दाई मंदिर के दिवालों पर हजारों की संख्या में भक्त अपनी बात, मनोकामना लिखकर माता से वार्तालाप करते हैं। माता उनकी फरियाद को पुरी करती है, यही वजह है कि अब दिनोंदिन दिवाल पर संदेशो की संख्या बड़ती जा रही है।

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माता और भक्तों के बिच संवाद का अनोखा तरिका। भक्त माता से कहते हैं अपनी सिधी बात, माता भी भक्तों की फरियाद पड़ लेती है, और उनकी मनोकमाना पुरी करती है। बात अचरजपुर्ण है, पर सत्य है। जांजगीर चांपा जिले के खोखरा में विराजित मां मनका दाई मंदिर के दिवालों पर हजारों की संख्या में भक्त अपनी बात, मनोकामना लिखकर माता से वार्तालाप करते हैं। माता उनकी फरियाद को पुरी करती है, यही वजह है कि अब दिनोंदिन दिवाल पर संदेशो की संख्या बड़ती जा रही है।

हे मां मुझे परिक्षा में अच्छे नंबरो से पास करा दें, माता मनका दाई मेरा स्थानातंरण मनचाहे स्थान में करादे। माता मेरे बेटे की नौकरी लगा दे और उसकी शादी हो जाये। ये सब वाक्य उन भक्तों के हैं जो कि माता मनका दाई को अपनी कामना बताते हैं। उनके मनोकामना बताने का तरिका भी अनोखा है, भक्तगण मुख्य मंदिर के दिवाल पर अपनी प्रार्थना लिखते हैं। इसे माता और भक्तों के संवाद का तरिका मान सकते हैं। शायद भक्तों को लगता है कि एसे दिवाल में अपनी बात लिखने से मां मनका दाई तक वह बात पहुंचती है और पुर्ण फलिभुत होती है।

भक्‍तों की कई समस्या, मांग और कामना होती है, वह मंदिर में माता के पास अपना दुखड़ा लेकर आते है। पुजा उपासना चड़ावे के साथ ही वे मां मनका से सिधे बात करना चाहते हैं।

यही वजह है कि मंदिर प्रबंधन की आरे से दिवाल पर लिखने की मनाही के बावजुद रोज हजारों की संख्या में भक्त अपनी फरियाद लिख रहें हैं।

कहते हैं कि मन से पुकारों तो भगवान जरूर सुनता है। किसी तरह के विधी-विधान की जरूरत नहीं, बस भगवान के प्रति आपकी अगाध श्रद्धा, प्रेम और समर्पण ही काफी है।

मां मनका दाई के भक्तों ने अपने आराध्य देवी से बात, संवाद करने के इस तरीके से उनको लगता है कि वे देवी के और करीब पहुचते हैं। इस तरह फरियाद लिखने से उनकी मनोकामना पुरी होती है।

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