गरीब परिवार ने आर्य मंदिर में करवाई शादी, समाज ने सुना दिया ये तुगलकी फरमान

पीड़ित पक्ष अब न्याय की गुहार लगा रहा है, वही समाज के पदाधिकारी आरोपों को निराधार बताते हुए केवल भोज के लिए कहने की बात कह रहे है.

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: July 13, 2019, 3:33 PM IST
गरीब परिवार ने आर्य मंदिर में करवाई शादी, समाज ने सुना दिया ये तुगलकी फरमान
समाज के अध्यक्षों ने परिवार को पूरे समाज को भोज और अर्थदंड की सजा दी.
Manohar Singh Rajput
Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: July 13, 2019, 3:33 PM IST
छत्तीसगढ़ में शासन-प्रशासन जहां शादियों में खर्च कम करने के लिए सामूहिक विवाह को बढ़ावा दे रही है. वहीं समाज के ठेकेदार आज भी नियमों की आड़ में लोगों को परेशान कर रहे है. ऐसा ही एक मामला महासमुंद जिले में देखने को मिल रहा है. यहां घोबी समाज के पदाधिकारियों ने एक गरीब को इसलिए 21 हजार का अर्थ दण्ड और समाज को भोज कराने का तुगलकी फरमान सुनाया, क्योकि आर्थिक तंगी के कारण उस परिवार ने अपने ही समाज के युवती के साथ सामाजिक रिति रिवाज के बजाए आर्य समाज के मंदिर में जाकर शादी कर ली. जहां पीड़ित पक्ष अब न्याय की गुहार लगा रहा है, वही समाज के पदाधिकारी आरोपों को निराधार बताते हुए केवल भोज के लिए कहने की बात कह रहे है.

ये है पूरा मामला:



महासमुंद मुख्यालय से महज 12 किमी की दूरी पर स्थिति है तुमगांव नगर पंचायत. तुमगांव नगर पंचायत के वार्ड नंबर 13 के रहने वाले है रमेश निर्मलकर, जो धोबी समाज से है. रमेश का बेटा है नागेश्वर निर्मलकर, वो एक पेट्रोल पंप में काम करता है. रमेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. रमेश मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता है. आर्थिक तंगी के कारण रमेश ने अपने बेटे नागेश्वर की शादी अपने ही समाज की युवती से 3 दिसंबर 2018 को रायपुर के आर्य समाज के मंदिर में कर दी.

शादी के बाद रायपुर नगर निगम में शादी का पंजीयन भी करावा लिया.  समाज के लोगों ने शुरू में तो कुछ नहीं बोला, पर सात महीने बाद 8 जून 2019 को समाज का चपरासी रमेश के घर आता है और समाज के बैठक में बुलाए जाने की जानकारी उसे दी. रमेश अपने बेटे नागेश्वर को लेकर सामाजिक बैठक में जाता है, जहां कथित समाज के ठेकेदार नागेश्वर की शादी सामाजिक रिति रिवाज से नहीं करने एवं समाज को भोज नहीं देने के कारण अवैध बताते हुए रमेश पर 21 हजार का अर्थ दण्ड और समाज के लोगों को भोज कराने का फैसला सुनाते हुए दो माह का समय देते है.

रमेश ने अर्थ दण्ड और समाज को भोज कराने में असमर्थता जाहिर की तो समाज के ठेकेदारों ने उसके परिवार को समाज से बहिकृत कर दिया. रमेश के द्वारा मिन्नत करने पर अर्थ दण्ड 21 हजार रूपए से घटाकर 16 हजार रूपए कर दिया गया. उसके बाद पीड़ित रमेश ने अपने प्रदेश अध्यक्ष से मदद की गुहार लगाई. प्रदेश अध्यक्ष के समझाने के बाद भी तुमगांव के पदाधिकारी नहीं माने. अब पीड़ित ने पुलिस महानिदेशक से मदद की गुहार लगाई है.

पुलिस कह रही जांच करने की बाच

इस पूरे मामले में मीडिया में जब समाज के पदाधिकारियों से सवाल किया गया तो समाज के प्रमुख गोविंद निर्मलकर का कहना है कि पीड़ित को बहिकृत और अर्थ दण्ड नहीं लगाया गया है. बल्कि समाज को भोज कराने के लिए कहा गया है. वहीं इस पूरे मामले में एसपी संतोष सिंह का कहना है कि प्राथमिक जांच में अर्थ दण्ड लगाना और बहिष्कृत करना सही पाए गया है. समाज के आठ लोगों पर मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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