इन पक्षियों को ग्रामीण मानते हैं देवदूत, अच्छी बारिश और फसल का देते हैं संकेत
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इन पक्षियों को ग्रामीण मानते हैं देवदूत, अच्छी बारिश और फसल का देते हैं संकेत
प्रवासी पक्षी एशियन ओपन बिल स्ट्रोक

महासमुंद और गरियाबंद जिले की सीमा से लगा लचकेरा गांव में एशियन ओपन बिल स्ट्रोक पक्षी भारी संख्या में प्रजनन के लिए पहुंच रहा है. मानसून के आने के साथ ही इन पक्षियों की संख्या में लगातार वृद्धि होने की संभावना है. लचकेरा गांव में ये पक्षी पीपल, आम, कहुआ और इमली जैसे पेड़ों पर अपना आशियाना बनाते हैं.

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महासमुंद से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लचकेरा गांव इन दिनों प्रवासी पक्षियों का ठिकाना बना हुआ है. लचकेरा में प्रजनन के लिए एशियन ओपन बिल स्ट्रोक पक्षियों ने अपना डेरा बसाया है. सैंकड़ों की संख्या में आ रहे इन पक्षियों के कलरव से लचकेरा गांव गुंजायमान होने लगा है. बरसात के दिनों में इन पक्षियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है. ग्रामीण इन पक्षियों को देवदूत मानते हैं और इन्हें शुभ मानते हुए खेती का काम शुरू करते हैं.

महासमुंद और गरियाबंद जिले की सीमा से लगा लचकेरा गांव में एशियन ओपन बिल स्ट्रोक पक्षी भारी संख्या में प्रजनन के लिए पहुंच रहा है. मानसून के आने के साथ ही इन पक्षियों की संख्या में लगातार वृद्धि होने की संभावना है. लचकेरा गांव में ये पक्षी पीपल, आम, कहुआ और इमली जैसे पेड़ों पर अपना आशियाना बनाते हैं. ये पक्षी मानसून के समय इस गांव में आते हैं और दीपावली के समय यहां से पलायन कर जाते हैं.

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गांव में एशियन ओपन बिल स्ट्रोक पक्षी कब से आ रहे हैं इसका ग्रामीणों को भी ठीक से पता नही, लेकिन वे कहते हैं कि बचपन से ही हर साल ये पक्षी यहां आते हैं. गांव में इन पक्षियों के देवदूत मानते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इन पक्षियों के आने से अच्छी फसल और अच्छी बारिश होती है. ग्रामीण इन पक्षियों की देखभाल भी करते हैं और इनकी निगरानी के लिए अर्थदंड का प्रावधान भी रखा है. ग्रामीणों का कहना है कि जो इन पक्षियों को मारता है उस पर 1000 रुपए का जुर्माना है और जो इसकी सूचना देता है उसे 500 रुपए का इनाम भी दिया जाता है.
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प्रवासी पक्षी एशियन ओपन बिल स्ट्रोक बांग्लादेश, कंबोड़िया, चीन, आलोस, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलेंड और वियतनाम में बहुतायात में पाये जाते हैं. प्रायः अन्य पक्षियों की तरह इस पक्षी का प्रजनन काल भी जुलाई माह में प्रारंभ होता है.  प्रजनन के लिए यह पक्षी प्रायः उन स्थानों की तलाश करते हैं, जहां पानी और पर्याप्त आहार की उपलब्धता हो. छत्तीसगढ़ में यह पक्षी प्रायः महानदी और उनकी सहायक नदियों के आसपास के गांवों में देखे जाते हैं. छत्तीसगढ़ के ऐसे करीब 10 से 12 गांव है जहां ये पक्षी देखे जाते हैं.

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