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महासमुंद: बदहाल शिक्षा व्यवस्था के बीच अपना भविष्य गढ़ने में जुटे हैं बच्चे

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: August 29, 2018, 8:04 AM IST
महासमुंद: बदहाल शिक्षा व्यवस्था के बीच अपना भविष्य गढ़ने में जुटे हैं बच्चे
महासमुंद: बदहाल शिक्षा व्यवस्था के बीच अपना भविष्य गढ़ने में जुटे हैं बच्चे

महासमुंद जिले में बच्चों की दर्ज संख्या साल दर साल घटती जा रही है. करीब तीन हजार शिक्षक और चपरासी के पद खाली हैं. पालक, जनप्रतिनिधि, शाला प्रबंधन समिति तक कलेक्टर से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई.

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छत्तीसगढ़ शासन शिक्षा का स्तर उठाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है. यही वजह है कि शासन 5 वर्षों के लिए डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम गुणवत्ता वर्ष मना रही है. इसका 5वां और अंतिम वर्ष 2018-19 का सत्र है, लेकिन इस दौरान महासमुंद जिले में बच्चों की दर्ज संख्या साल दर साल घटती जा रही है. बता दें कि करीब तीन हजार शिक्षक से लेकर चपरासी तक के पद वर्षों से खाली हैं. पालक, जनप्रतिनिधि, शाला प्रबंधन समिति आए दिन कलेक्टर कार्यालय में आकर शिक्षक नहीं होने का रोना रोते हैं. ऐसे में शिक्षकों के अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बावजूद इसके शिक्षा विभाग के आला अधिकारी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं, जबकि इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है.

महासमुंद में 1280 प्राथमिक, 490 मिडिल, 159 हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं. शासकीय आंकड़ों के मुताबिक बच्चों की दर्ज संख्या वर्ष 2014-15 में कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक 1,96,406 थी, जो वर्ष 2015-16 में घटकर 1,93,156 हो गई है. वहीं वर्ष 2016-17 में घटकर 1,79,488 और 2017-18 में घटकर 1,35000 हो गई है. यह शासन के गुणवत्ता और शिक्षा के स्तर को बयां करने के लिए काफी है.

बता दें कि जिले में कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक के 1729 शासकीय स्कूलों के लिए 10534 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं जबकि महज 7665 लोग ही कार्यरत हैं. इसमें स्कूल प्राचार्य, व्याख्याता, हेड मास्टर, यूडीटी, सहायक शिक्षक, बाबू, चपरासी सभी शामिल हैं. इसमें 2869 पद वर्षों से खाली हैं, जिसमें प्राचार्य के 143 पद, उप प्राचार्य के 3 पद, व्याख्याता के 141, व्याख्याता पंचायत के 292, प्रधान पाठक मिडिल स्कूल के 273, शिक्षक के 142, व्यायाम शिक्षक के 56, प्रधान पाठक प्राथमिक के 805, सहायक शिक्षक के 346, सहायक ग्रेड 3 के 102 और चपरासी के 563 पद खाली हैं.

ऐसे में ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि किस तरह यहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बच्चे बिना शिक्षक के ही अपना भविष्य गढ़ने को लगे हैं. पालक से लेकर जनप्रतिनिधि आए दिन कलेक्टर जनदर्शन में शिक्षक की मांग लेकर गुहार लगाते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है.

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First published: August 29, 2018, 8:04 AM IST
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