छत्तीसगढ़ : महासमुंद की बेटी प्रज्ञा चंद्राकर अब हार्वर्ड में करेंगी कोरोना वैक्सीन के लिए रिसर्च

फिलहाल प्रज्ञा चंद्राकार अमेरिका के न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च फेलो के पद पर कार्यरत हैं.

महासमुंद की डॉ प्रज्ञा चंद्राकर का चयन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लिए हुआ है. अब वह हार्वर्ड में कोरोना वायरस और उसके वैक्सीन पर काम करेंगी. प्रज्ञा के पिता गजानंद चंद्राकर पेशे से शिक्षक हैं और मां मंजू चंद्राकर गृहणी.

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महासमुंद. विश्व इस समय कोरोना महामारी (corona epidemic) से जूझ रहा है. इससे निबटने के लिए तरह-तरह की दवा बनाई जा रही है, वैक्सीनेशन (Corona vaccination) पर जोर दिया जा रहा है. अब तक इस युद्ध में वैक्सीन को सबसे कारगर हथियार माना जा रहा है. ऐसे समय में महासमुंद (Mahasamund) की रहनेवाली डॉक्टर प्रज्ञा चंद्राकर (Dr. Pragya Chandrakar) का चयन अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) में हुआ है. महासमुंद की यह बेटी अब कोविड-19 वायरस पर काम करेगी और वैक्सीन निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगी. महासमुंद के क्लबपारा के रहनेवाले चंद्राकर परिवार की सबसे छोटी बेटी है प्रज्ञा चंद्राकर. प्रज्ञा के पिता गजानंद चंद्राकर पेशे से शिक्षक हैं और मां मंजू चंद्राकर गृहणी.

फिलहाल ट्यूबेरकुलेसिस और कालाजार पर रिसर्च 

CSIR-JRF में ऑल इंडिया रैंक 55 प्राप्त कर प्रज्ञा ने लखनऊ के CSIR-CDRI से अपनी पीएचडी पूर्ण की. पीएचडी में पब्लिकेशन के आधार पर उनका हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लिए हुआ है. फिलहाल प्रज्ञा चंद्राकार अमेरिका के न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च फेलो के पद पर कार्यरत हैं और ट्यूबेरकुलेसिस और कालाजार पर रिसर्च कर रही हैं. डॉक्टर प्रज्ञा चंद्राकर के मुताबिक, उन्होंने नहीं सोचा था कि हार्वर्ड में चयन हो जाएगा. चयन होने पर वह बेहद खुश हैं. वह कहती हैं कि सफलता के लिए पैशन जरूरी होता है. मैंने खूब मेहनत की थी. पीएचडी के पब्लिकेशन के आधार में चयन हुआ है. मेरा पैशन मुझे हॉर्वर्ड ले गया. मुझे ऐसा लगता है. कि हार्वर्ड में मुझे बेहतर करना है. वहां की सुविधाओं का अच्छे से उपयोग कर अच्छा रिसर्च करना चाहती हूं ताकि जब भारत लौटूं तो एक एमिनेंट साइंटिस्ट बन कर लौटूं. अपने देश के लिए बेहतर कर सकूं ये कोशिश हमेशा रहेगी. अभी मैं टी. बी. बीमारी के टीकानिर्माण पर काम कर रही हूं. मेरी रोल मॉडल मैडम क्यूरी रही हैं. वे पहली महिला साइंटिस्ट थीं, उनसे मुझे बहुत इंस्पीरेशन मिलता है.

साइंस के लिए जरूरी है धीरज और धैर्य की परिभाषा

प्रज्ञा अपनी उपलब्धि का श्रेय भगवान को देते हुए कहती हैं कि वैसे साइंस मेरे लिए भगवान है. दूसरा श्रेय मैं पीएचडी के मेरे मेंटर डॉक्टर सुशांताकार को देना चाहूंगी, जिन्होंने मुझे सिखाया कि गुड साइंस क्या होता है. उन्होंने ही साइंस के लिए धैर्य और धीरज की परिभाषा सिखाई.

मां-पिता दोनों बहुत खुश

प्रज्ञा के चयन पर पिता गजानंद चंद्राकर बेहद खुश हैं. कहते हैं कि हार्वर्ड में चयन हो जाएगा ये तो हमने भी नहीं सोचा था, पर चयन हुआ. बेहद खुशी है. बेटी प्रज्ञा शुरू से ही मेधावी रही है. इस उपलब्धि से हम सभी खुश हैं क्योंकि बेटी ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन किया है.

प्रज्ञा की शुरुआती शिक्षा

महासमुंद के क्लबपारा के रहनेवाले चंद्राकर परिवार की सबसे छोटी बेटी है प्रज्ञा चंद्राकर. प्रज्ञा के पिता गजानंद चंद्राकर पेशे से शिक्षक हैं और मां मंजू चंद्राकर गृहणी. प्रज्ञा चंद्राकर बचपन से ही मेधावी छात्र रही हैं. हर साल क्लास में प्रथम आती रही हैं. स्कूल में अच्छे परिणाम के लिए कई बार उन्हें सम्मनित किया गया है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा महासमुंद के वेडनर मेमोरियल स्कूल में हुई है. उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. प्रज्ञा ने स्नातक डिग्री चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से ली और परास्नातक तमिलनाडु के अन्नामलाई विश्वविद्यालय से किया.