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ना तो पुस्तकें मिलीं और ना ही शिक्षक, कैसे बनेगा इन बच्चों का भविष्य ?
Mahasamund News in Hindi

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: July 29, 2018, 8:43 AM IST
ना तो पुस्तकें मिलीं और ना ही शिक्षक, कैसे बनेगा इन बच्चों का भविष्य ?
सरकारी स्कूल, महासमुंद

जिले में 1280 प्राथमिक स्कूल और 480 मीडिल स्कूल संचालित हो रहे हैं. इन 1760 सरकारी स्कूलों में एक लाख 35 हजार छात्र-छात्राएं अपने भविष्य गढ़ने के लिए आते हैं.

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‘स्कूल आ पढ़े बर, जिनगी ला गढ़े बर’ ये वही स्लोगन है जिसके जरिये छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में शिक्षा के तमाम दावों का दम भरता है, लेकिन शिक्षा विभाग के तमाम दावे और स्लोगन छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में जाकर फेल हो जाते हैं.

महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग के दावों की एक बार फिर पोल खुलती नज़र आ रही है. जिले में 1280 प्राथमिक स्कूल और 480 मीडिल स्कूल संचालित हो रहे हैं. इन 1760 सरकारी स्कूलों में एक लाख 35 हजार छात्र-छात्राएं अपने भविष्य गढ़ने के लिए आते हैं. शिक्षा सत्र 2018-19 को शुरू हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन जिले के करीब 6 हजार छात्र-छात्राएं पाठ्य पुस्तकों के लिए तरस रहे हैं.

जनवरी 2018 में शिक्षा विभाग के संचानालय से 2018-19 के सत्र से एक ब्लॉक के दो स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू करने के आदेश जारी किए गए थे, जिसके बाद जिले के पांच ब्लॉक के पांच प्राथमिक और पांच मिडिल स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के लिए बच्चों के प्रवेश लिए गए. इन बच्चों को शिक्षा विभाग डेढ़ माह बाद न तो पुस्तकें मिलीं और न ही पढ़ाने के लिए शिक्षक मिल सका.

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First published: July 29, 2018, 8:31 AM IST
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