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आर्य समाज मंदिर में शादी कराने पर परिवार का बहिष्कार, 21 हजार व भोज कराने का फरमान

आर्य समाज मंदिर में शादी करने पर गरीब परिवार का बहिष्कार (सांकेतिक तस्वीर)

आर्य समाज मंदिर में शादी करने पर गरीब परिवार का बहिष्कार (सांकेतिक तस्वीर)

एक गरीब पिता ने फिजूलखर्जी से बचने के लिए अपने बेटे की शादी आर्य समाज मंदिर में करा दी. जिसकी खबर मिलने पर समाज के कथित ठेकेदार नाराज हो गए.

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    छत्तीसगढ़ के महासमुंद में मानवता को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. यहां एक गरीब पिता ने फिजूलखर्जी से बचने के लिए अपने बेटे की शादी आर्य समाज मंदिर में करा दी. जिसकी खबर मिलने पर समाज के कथित ठेकेदार नाराज हो गए. नाराज हो गए. इन ठेकेदारों ने व्यक्ति के इस फैसले पर पंचायत बुलाई और उस पर पूरे गांव को भोज कराने और 21 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने का फरमान सुना दिया. व्यक्ति ने अपनी आर्थिक स्तिथि का हवाला देते हुए फरमान को मानने में असमर्थता जताई तो पंचायत ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. समाज के अध्यक्ष ने भी पदाधिकारियों को समझाया, लेकिन वे नहीं माने. इसके बाद परिवार की ओर से 9 लोगों के खिलाफ डीजीपी से शिकायत की गई है.

    जानकारी के मुताबिक मामला तुमगांव पंचायत का है. पीड़ित परिवार पंचायत के वार्ड नंबर 13 का रहने वाला है. रमेश निर्मलकर नाम के शख्स का बेटा नागेश्वर निर्मलकर एक पेट्रोल पंप में काम करता है. रमेश की आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं है. आर्थिक तंगी की वजह से रमेश ने अपने बेटे नागेश्वर की शादी अपने ही समाज की लड़की से 3 दिसंबर 2018 को रायपुर के आर्य समाज के मंदिर में कर दी. साथ ही रायपुर नगर निगम में शादी का पंजीयन भी करावा लिया.

    असमर्थता जताने पर किया समाजिक बहिष्कार-

    शुरूआत में तो किसी ने कुछ नहीं बोला. लेकिन सात महीने बाद अचानक रमेश एक समाजिक बैठक में बुलाए जाने की सूचना मिली. इस बैठक में वह अपने बेटे के साथ पहुंचा. इस दौरान शादी समाजिक रीति-रिवाज से नहीं करने की बात कहकर नागेश्वर की शादी को अवैध बता दिया. साथ ही 21 हजार का जुर्माना और समाज के लोगों को भोज कराने का फैसला सुनाते हुए 2 महीने का वक्त दिया. जब नागेश्वर के पिता ने भोज कराने और जुर्माना भरने में असमर्थता जताई तो जुर्माने की राशि घटाकर 16 हजार कर दी गई, लेकिन भोज कराने की बात कही.

    जांच जारी-

    मामला पूलिस के पास पहुंचने पर जिले के एसपी ने कहा है कि शुरुआती जांच में अर्थदंड लगाना और समाजिक बहिष्कार का मामला सही पाया गया है. समाज के नौ लोगों पर मामला दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

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