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सूखे की मार झेल रहे किसानों को तरबूज की मिठास ने दी राहत

Manohar | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 7, 2018, 4:51 PM IST
सूखे की मार झेल रहे किसानों को तरबूज की मिठास ने दी राहत
सूखे की मार झेल रहे किसानों को तरबूज की मिठास से मिली राहत

महासमुंद जिले के महानदी तट के किनारे रहने वाले दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने करीब 2 हजार एकड़ रकबे में तरबूज, खरबूज और खीरा के साथ मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की है.

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छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसान सूखे की मार झेल रहे हैं. वहीं इस बीच महासमुंद जिले के महानदी तट के किनारे रहने वाले दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने करीब 2 हजार एकड़ रकबे में तरबूज, खरबूज और खीरा के साथ मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की है. इतना ही नहीं महानदी के सीने में उपज होने वाले इन तरबूजों की मिठास केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि मुंबई, कोलकाता, ओडिशा समेत कई बड़े प्रदेशों और महानगरों तक फैली हुई है.

महासमुंद से होकर गुजरने वाली महानदी और जोंक नदी के तट पर क्षेत्र के किसान तरबूज और खरबूज के साथ खीरे की खेती कर रहे हैं. हर साल दिसंबर माह से क्षेत्र के सैकड़ों किसान परिवार महानदी के तटों पर इनकी खेती करने में लग जाते हैं. इससे ये किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. किसानों द्वारा उत्पादित इन फसलों को हर साल यहां से बड़ी मात्रा में तरबूज और खरबूज को रायपुर से मुंबई के रास्ते दुबई भेजा जाता है. दुबई के हर बड़े होटलों में महासमुंद के तरबूज परोसे जाते हैं. इसके लिए बाकायदा बड़े फल व्यापारी किसानों से संपर्क करते हैं.

वहीं इस साल करीब 2 हजार एकड़ में तरबूज, खरबूज और खीरे के साथ मौसमी सब्जियों की फसल किसान ले रहे हैं. नदी तट होने के कारण किसानों को यहां लागत भी कम आती है. किसानों की मानें तो वो जितनी लागत फसलों के उत्पादन में लगाते हैं, उसका 3 गुना किसान 6 माह के अंदर कमा लेते हैं. हालांकि इस दौरान कई बार किसानों को नदी में पानी छोड़े जाने का डर भी बना रहता है.

उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक आर. एस. वर्मा ने बताया कि यह कम लागत की फसल है. तीन महीने के सीजन वाले इस फसल से किसान को कम समय में लागत से कई गुना ज्यादा आमदनी कमा रहे हैं. इसके लिए किसानों को विभाग बीज कीट भी उपलब्ध करा रहा है. साथ ही किसानों को फसल लेने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में सूखे की हालत को देखते हुए ज्यादा पानी सोखने वाली फसलों पर रोक लगा दिया है. ऐसे में नदी किनारे उन्नत किसानी करने वाले इन किसानों ने उन्नत पैदावर कर पानी की बर्बादी नहीं करने का संदेश दिया है. साथ ही किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाते हुए अन्य किसानों को भी इस खेती को करने का संदेश दे रहे हैं.

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First published: March 7, 2018, 4:42 PM IST
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