महासमुंद में सड़कों का हाल बेहाल, लाखों में बनी सड़क अब गड्ढों में तब्दील

ग्रामीण सड़कों की खस्ता हालत की शिकायत उच्च अधिकारियों को कर के थक चुके है लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है.

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: July 5, 2019, 4:41 PM IST
महासमुंद में सड़कों का हाल बेहाल, लाखों में बनी सड़क अब गड्ढों में तब्दील
महासमुंद में सड़कों की हालत काफी खराब हो गई है.
Manohar Singh Rajput
Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: July 5, 2019, 4:41 PM IST
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत महासमुंद जिले में बनाई गई चार दर्जन से ज्यादा सड़कें आज प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई है. तीन दर्जन के आसपास सड़कें खराब हो चुकी है. सड़कों पर जगह -जगह गड्ढे हो गए है और डामर उखड़ गया है. खराब सड़कों की वजह से ग्रामीण और स्कूली बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जहां ग्रामीण सड़कों की खस्ता हालत की शिकायत उच्च अधिकारियों को कर के थक चुके है, वहीं आला अधिकारी शासन स्तर का मामला बताते हुए अपने जिम्मेदारियों से पलड़ा झाड़ते दिख रहे है.

कुछ ही सालों में सड़कों का हाल बेहाल

महासमुंद जिले में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरूआत वर्ष 2011-12 में हुई. तब से लेकर आज तक जिले में 68 सड़कें स्वीकृत हुई. इनमे से दो सड़कें किसी वजह से निरस्त हो गई. 66 सड़कों में से 53 सड़क जो लगभग 166 किमी का है करोड़ों की लागत से बन कर तैयार हो चुकी है. वहीं 13 सड़कों का काम प्रगति पर है जो 2020 तक बन कर पूरा हो जाएगा.

लेकिन विडंबना है कि 53 सड़कों में से 33 सड़क तीन साल की मियाद पूरी कर चुकी है और सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो चुके है. यहां तक की डामर सड़क से उखड़ गया है. इस वजह से ग्रामीणों को आने-जाने में कठिनाई हो रही है. इन्ही मुख्समंत्री सड़कों में से एक है खट्टी-जीवतरा मार्ग. इस सड़क की लम्बाई ढाई किमी है. इसका निर्माण 2014 में 117 लाख की लागत से किया गया जो वर्तमान में गड्ढों में तब्दील हो चुका है.

शिकायत के  बाद भी नहीं हो रही मरम्मत

खट्टी-जीवतरा मार्ग गड्ढों में बदल गया है. इस वजह से ग्रामीणों को आने-जाने में बहुत तकलीफ हो रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि खराब हुई सड़कों की शिकायत कई बार आला अधिकारियों से की जा चुकी है लेकिन अभी तक सड़क के मरम्मत का काम नहीं किया गया है.  वहीं इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग के ईई पीके गुप्ता इसे शासन स्तर का मामला करार दिया.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कों की लाइफ तीन साल तक की होती है. उसके बाद विभाग को प्रकरण तैयार कर शासन को भेजना होता है, ताकि शासन से स्वीकृति मिलने के बाद उस रोड पर दोबारा काम हो सके. पर तीन-तीन साल बाद भी शासन के संज्ञान में नहीं लाया जाना कई सवालों को जन्म देता है.
Loading...

ये भी पढ़ें:

बेमेतरा में आधी रात टूटा बैंक का ताला, एटीएम लूटने की भी कोशिश



राजनांदगांव में मानव तस्करी की आशंका, पुलिस ने 5 बच्चों का किया रेस्क्यू

 
First published: July 5, 2019, 4:41 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...