ग्रामीण अंचलों में संचालित 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में लटका ताला, ये है वजह

ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के हड़ताल पर जाने से ग्रामीण अंचलों में संचालित 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटक रहा है. इससे गर्भवती महिलाओं और शिशुओं का टीकाकरण नहीं हो पा रहा है.

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: August 5, 2018, 1:10 PM IST
ग्रामीण अंचलों में संचालित 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में लटका ताला, ये है वजह
ग्रामीण अंचलों में संचालित 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में लटका ताला
Manohar Singh Rajput
Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: August 5, 2018, 1:10 PM IST
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के हड़ताल पर जाने से ग्रामीण अंचलों में संचालित 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटक रहा है. इससे गर्भवती महिलाओं और शिशुओं का टीकाकरण नहीं हो पा रहा है, वहीं चिकित्सीय सेवा भी अब बंद हो गई है. इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह ठप हो गईं हैं.

महासमुंद के ग्रामीण क्षेत्रों के 222 उप स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक अपनी मांगों को लेकर बीते 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इससे ग्राम पंचायतों के उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटक गया है. जिलेभर के 415 ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी अस्पतालों में ताला लगाकर हड़ताल पर चले गए हैं.

हड़ताल से ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है. ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं के नहीं मिलने से ग्रामीण खासे परेशान हैं. ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा की आस में अस्पताल तो आते हैं, लेकिन अस्पतालों में ताला लटका देख वापस लौट जाते हैं. बता दें कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान भी शुरू होगा. इसके तहत जिले के 3 लाख 13 हजार बच्चों को एमआर का टीका लगाया जाना है. अगर हड़ताल लंबी चली, तो टीकाकारण का काम भी पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगा.

स्वास्थ्य संयोजकों की मानें तो कैडर 12 वर्षों से वेतन विसंगति की मार से जूझ रहा है. शासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी मांगों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई. संघ द्वारा वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर 2015 में 26 अक्टूबर से 5 नवंबर तक बेमुद्दत आंदोलन किया गया था. इसके बाद 17 जुलाई 2018 को प्रदेश स्तरीय सांकेतिक हड़ताल कर सरकार को मांगों पर विचार करने का समय दिया गया, लेकिन शासन ने कोई पहल नहीं की.

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी स्वास्थ्य संयोजकों के हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था चरमराने की बात कबूलते हुए हड़ताल को गलत बता रहे हैं. ऐसे में किसी भी प्रकार की घटना घटित होने पर वहां के स्वास्थ्य संयोजक पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है.
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