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हेराफेरी के मामले में फंसे तहसीलदार, कोर्ट ने दिए जुर्म दर्ज करने के आदेश, पढ़ें- पूरी डिटेल

महासमुंद कोर्ट ने तहसीलदार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

महासमुंद कोर्ट ने तहसीलदार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

एक तहसीलदार कागजों की हेराफेरी के मामले में फंस गए हैं. नियमों को ताक पर रखकर जमीन से जुड़े एक प्रकरण में फेरबदल करने का आरोप तहसीलदार पर लगा है. छत्तीसगढ़ के महासमुंद में सीजीएम कोर्ट के न्यायाधीश ने तहसीलदार प्रेमु साहू पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. जमीन फावती के राजस्व आदेश पत्रिका में हेराफेरी करने व कूट रचना करने का आरोप उनपर लगा है.

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महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद में सीजीएम कोर्ट के न्यायाधीश ने तहसीलदार प्रेमु साहू पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. साथ ही पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच के बाद प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है. सीजीएम कोर्ट के न्यायाधीश चित्रलेखा सोनवानी ने यह आदेश दिया है. तहसीलदार पर जमीन फावती के राजस्व आदेश पत्रिका में हेराफेरी करने व कूट रचना करने का आरोप है. ऑनलाइन व ऑफलाइन आदेश की कॉपी लेने पर राजस्व प्रकरण पत्रिका में हेराफेरी करने का खुलासा हुआ.

महासमुंद कोर्ट में 14 जून को आवेदक अमरजीत गुरुदत्ता ने कोर्ट में याचिका लगाई. उसमें बताया कि कोतवाली थाने और एसपी के पास आवेदन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई. प्रकरण की सुनवाई के बाद कोर्ट ने धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत तहसीलदार सहित संलिप्त अन्य लोगों पर प्रथम एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है. अंतिम जांच प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने को कहा है. पक्षकार के वकील अनिल शर्मा से मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला जमीन फावती लेने को लेकर है. 28 जुलाई 2021 को आवेदक अमरजीत के पिता हिम्मत सिंह ने तहसील कार्यालय में अपने पिता गुरमुख सिंह की मृत्यु के बाद पिटियाझर स्थित खसरा नंबर 72/23, रकबा नंबर 0.028 का फावती दर्ज कराने राजस्व प्रकरण दायर किया था.

इस तरह की हेराफेरी
प्रकरण की सुनवाई 21 मार्च 2022 को रखी गई. पेशी कैंसिल होने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 06 अप्रैल निर्धारित किया गया, लेकिन स्टे आवेदन के कारण सुनवाई फिर नहीं हुई. इसके बाद 16 मई को तिथि निर्धारित कर तहसीलदार के द्वारा स्थगन सुनवाई कर दी गई और विपक्षकार सुरेंद्र सिंह चांवला के पक्ष में प्रकरण को खारिज कर दिया गया. इसके बाद पक्षकार ने जब राजस्व पत्रक की जानकारी ली तो पता चला कि पेशी टलने के बाद भी ऑफलाइन में 21 मार्च के आवेदन को बदला गया. 06 अप्रैल को सुनवाई टलने के बाद उस तिथि की सुनवाई को 18 अप्रैल बता दिया गया और सुनवाई होना दिखाया गया है, लेकिन ऑनलाइन में प्रकरण ज्यो का त्यों है. ऑनलाइन में प्रकरण यथावत और ऑफ लाइन में आदेश पत्रिका में फेरबदल व हेराफेरी करने की शिकायत दस्तावेजों के साथ पक्षकार ने तहसीलदार पर थाना कोतवाली में आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद कोर्ट का रूख किया गया.

Tags: Chhattisgarh news, Mahasamund News

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