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उत्पात करने वाले हाथियों से निजात पाने वन विभाग ने तैयार किया ये नया प्लान

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: May 29, 2019, 5:54 PM IST
उत्पात करने वाले हाथियों से निजात पाने वन विभाग ने तैयार किया ये नया प्लान
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वन विभाग के आला अधिकारी लोगों को जागरूक करने के लिए गांव में कैंप लगा रहे हैं. वहीं ग्रामीण भी वन विभाग के इस पहल को की काफी सराहना कर रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के हाथी प्रभावित 52 गांव के ग्रामीणों को राहत देने और जनहानि, फसल बर्बादी कम करने के लिए वन विभाग ने जगमग लाइट और उस इलाके में तार बिछाकर उसमें हल्की विद्युत प्रभावित कर हाथी को रोकने का प्लान तैयार किया है. साथ ही हाथी प्रभावित इलाकों में जन जागरूकता फैलाकर जनहानि को रोकने का एक अनूठा प्रयास करने की कोशिश भी की जाएगी. जहां एक ओर वन विभाग के आला अधिकारी लोगों को जागरूक करने के लिए गांव में कैंप लगा रहे हैं. वहीं ग्रामीण भी वन विभाग के इस पहल को की काफी सराहना कर रहे हैं.

हाथी ले चुके है 15 लोगों की जान

जानकारी के मुताबिक महासमुंद वन परिक्षेत्र के 52 ( लहगंर , परसाडीह ,जोबा , कुकराडीह , गुडरूहडीह , अछोला , मोहकम, अचानकपुर आदि ) गांव पिछले चार सालों से हाथी के आंतक से परेशान हैं. शासकीय आंकड़ों के मुताबिक हाथियों ने इन चार सालों में 15 ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया है. साथ ही डेढ़ दर्जन लोगों को घायल कर चुके हैं. साथ ही 1000 हेक्टयर की फसल बर्बाद हाथियों ने किया है. फिलहाल 18 हाथियों का दल कुकराडीह बंजर में विचरण कर रहा है. इन हाथियों से होने वाले जनहानि और फसल बर्बादी को रोकने के लिए वन विभाग ने कुकराडीह गांव के इलाकों में 700 मीटर तार बिछाया है. इन तारों में बैटरी से हल्की करंट प्रभावित की जाती है. जैसे ही हाथी इन तारों के संपर्क में आते है, उन्हें झटका लगता है और वे उस ओर नहीं आते है यानि की अपनी दिशा बदल देते है. इस तकनीक को वन विभाग ईआरबी पद्धति कहते है । दूसरी पद्धति का नाम है ई आर एल । इस पद्धति के अन्र्तगत वन विभाग ने कुकराडीह के तीन स्थानों पर जुगजुगी लाईट आम बोलचाल की भाषा में लगाये है । ये लाईट रात में फ्लेसर के माध्यम से जलती व बुझती रहती है । जिससे हाथी उन क्षेत्रों में नही जातें है.

लोगों में फैलाई जा रही जागरुकता

दूसरी तरफ लोगों को जागरूक करने के लिए वन विभाग के मुख्य वन सरंक्षक केके बिसने ने खुद कमान संभालते हुए गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. इसी कड़ी में मुख्य वन सरंक्षक केके बिसने बुधवार को ग्राम लहगंर पहुंचे और लोगों को जागरूक किया. वन विभाग के मुख्य वन सरंक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व रायपुर केके बिसने का कहना है कि यह पद्धति काफी कारगर है और इस पद्धति से ही सरगुजा में भी जनहानि रोकने में काफी मदद मिली है.

हाथी से बचने वन विभाग ने बनाया कैलेंडर

गौरतलब है कि वन विभाग हाथी से बचने के लिए एक कैलेंडर बनाया है. इस कैलेंडर में लिखा है कि इन दस कारणों से ही जनहानि होता है. हाथी संकट प्रबंधन दल की सलाह नहीं मानने से ,हाथियों के विचरण स्थलों में पैदल ,बाइक ,सायकल एवं अन्य वाहनों से जाने पर, हाथियों के विचरण स्थलों में खेत खलिहान ,मचान ,कच्चे मकान में सोने से ,हाथियों के समीप फटाखा फोडने से ,शौच के लिए खुले में जाने से ,हाथियों के साथ सेल्फी लेने से ,हाथियों के समीप चले जाने से , महुआ शराब ,खाद्यान के भंडारण स्थलों के पास रहने से ,हाथी विचरण स्थलों में महुआ बिनने जाने पर एवं हाथियों को देखने के लिए भीड़ लगाने पर जनहानि होती है. इसलिए इन बातों पर ध्यान देने से जनहानि को रोका जा सकता है.

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First published: May 29, 2019, 5:54 PM IST
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