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महासमुंद में मनरेगा के तहत बने 80 फीसदी तालाब सूखे, निस्तरी के लिए भटक रहे ग्रामीण

Manohar Singh Rajput | News18 Chhattisgarh
Updated: April 30, 2019, 4:25 PM IST
महासमुंद में मनरेगा के तहत बने 80 फीसदी तालाब सूखे, निस्तरी के लिए भटक रहे ग्रामीण
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4 सालों में करोड़ों रूपए से हजारों तालाब का गहरीकरण और सैकड़ों तालाब नए खोदवाए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में निस्तारी के लिए पानी उपलब्ध हो सके.

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जिला पंचायत द्वारा 4 सालों में करोड़ों रूपए से हजारों तालाब का गहरीकरण और सैकड़ों तालाब नए खोदवाए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में निस्तारी के लिए पानी उपलब्ध हो सके. पर इस भीषण गर्मी में जिले के 80 प्रतिशत तालाब सूख गए है और अब ग्रामीण निस्तारी के लिए भटक रहे है.

चिलचिलाती धूप और तेज गर्मी से लगातार भू-जल स्तर गिरता ही जा रहा है. हैंडपंप सूखते जा रहे है, गांवों में निस्तारी के लिए बनाया गया जीवन दायनी तालाब भी सूखते जा रहे है. महासमुंद जिले की बात करें तो जिले में 545 पंचायत है और इन ग्राम पंचायतों में करीब 1140 गांव शामिल है. जिले की आबादी लगभग 10 लाख 34 हजार की है. इन गांवों में जिला पंचायत द्वारा 2007 से मनरेगा के तहत नए तालाब निर्माण और पुराने तालाबों के गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार के साथ निस्तारी के लिए पानी भी उपलब्ध हो सके. पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. अब गर्मी में हालात ऐसे है कि जिले के 80 प्रतिशत तालाब या तो सूख गये है या फिर इतना कम पानी है कि उसमें निस्तारी करना भी संभव नहीं है. लिहाजा ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है.

शासकीय आंकड़ों पर एक नजर

वर्ष 2015-16 में 780 तालाब का गहरीकरण 6794 लाख रूपए से किया गया.

वर्ष 2016-17 में 76 तालाबों के गहरीकरण पर 816 लाख रूपए खर्च किए गए.

वर्ष 2017-18 में 322 तालाबों के गहरीकरण पर 1838 लाख रूपए.

वर्ष 2018-19 में 1140 तालाबों के गहरीकरण पर प्रशासन ने 9890 लाख रूपए खर्च किए.
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इस प्रकार पिछले चार सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो जिला प्रशासन ने 2318 तालाब गहरीकरण के नाम पर 19340 लाख रूपए खर्च किए है. वहीं नए तालाब निर्माण की बात करे तो...

वर्ष 2015-16 में 623 लाख रूपयें से 74 तालाब नए खोदे गए.

वर्ष 2016-17 में 597 लाख रूपयों से 62 नए तालाब खोदे गए

वर्ष 2017-18 में 1078 लाख रूपयों से 95 नए तालाब खोदे गए

वर्ष 2018-19 में 1061 लाख रूपयों से 70 नए तालाब ग्रामीण क्षेत्रों में निस्तारी के लिए खोदे गए

इस प्रकार पिछले चार सालों में जिला पंचायत के द्वारा 3360 लाख रूपयों से 301 नये तालाब का निर्माण कराया गया है. जिला पंचायत के द्वारा पीछले चार सालों में 22700 लाख रूपए खर्च करने के बाद भी 80 प्रतिशत तालाबों में पानी नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और कर्मचारी की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को ये समस्या पैदा हो रही है. भीषण कर्मी के बीच करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी जीवन दायनी तालाबों के सूखने के मामले में जब कलेक्टर से पूछा गया तो कलेक्टर महोदय का कहना है कि तालाब गहरीकरण कराने से कम से कम बरसात के बाद भी तीन-चार महिनों तक पानी ग्रामीणों को मिल जाता है नहीं तो और भी बुरा हाल हो जाता.

गौरतलब है कि नए तालाब के लिए 17 से 20 लाख रूपए और गहरीकरण के लिए 8 से 10 लाख रूपए जिला पंचायत खर्च करती है. बहरहाल ग्रामीणों को तालाब निर्माण और गहरीकरण से रोजगार तो मिल जाता है, पर शासन के करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर गिरने पर निस्तारी के लिए पानी नसीब नहीं होती.

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First published: April 30, 2019, 4:12 PM IST
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