अखाड़े से कम नहीं मुंगेली नगरपालिका, अध्यक्ष-पार्षदों के बीच तनातनी; विकास कार्य बाधित

पार्षदों से तंग आकर अध्यक्ष संतुलाल सोनकर ने थाने और पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई.

पार्षदों से तंग आकर अध्यक्ष संतुलाल सोनकर ने थाने और पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई.

मुंगेली नगरपालिका में बीजेपी का कब्जा है और संतुलाल सोनकर नगरपालिका के अध्यक्ष हैं लेकिन जब से अध्यक्ष बने है तब से कभी नगरपालिका अधिकारी तो कभी पार्षदों से विवादों में घिरे रहते है. कोरोना काल में भी पार्षद लगातार अध्यक्ष संतूलाल सोनकर के खिलाफ सोशल मीडिया में गुमशुदगी जैसे पोस्ट डालते रहे.

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मुंगेली. मुंगेली का नगरपालिका इन दिनों किसी अखाड़े से कम नहीं है. नगर विकास की बातों को छोड़कर यहां अध्यक्ष और पार्षदों में आए दिन विवाद और लड़ाई झगड़े होते दिखाई देते हैं. अब तो ये विवाद थाने और अजाक थाने तक पहुंच चुका है. अब तो आशंका यह भी है कि किसी दिन जमकर मारपीट या हाथापाई न हो. मुंगेली नगरपालिका में बीजेपी का कब्जा है और संतुलाल सोनकर नगरपालिका के अध्यक्ष हैं लेकिन जब से अध्यक्ष बने है तब से कभी नगरपालिका अधिकारी तो कभी पार्षदों से विवादों में घिरे रहते है. कोरोना काल में भी पार्षद लगातार अध्यक्ष संतूलाल सोनकर के खिलाफ सोशल मीडिया में गुमशुदगी जैसे पोस्ट डालते रहे.

वहीं पार्षदों से तंग आकर अध्यक्ष संतुलाल सोनकर ने थाने और पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई. इसके दो दिन बाद एक पार्षद राहुल कुर्रे की ओर से सिटी कोतवाली और अजाक थाना में अध्यक्ष के नगरपालिका में खिलाफ जान से मारने की धमकी और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाते हुये कार्रवाई की मांग का आवेदन दिया गया. मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. वही नागरिकों के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमेंद्र गोस्वामी का मानना है कि नगरपालिका के जनप्रतिनिधियों को आपसी लडाई नगरपालिका में सुलझाना चाहिये न कि थाने में. साथ ही विवाद के बजाय नगर के विकास और नगर के हित का काम करना चाहिये.

सभापति अरविंद वैष्णव ने कि अध्यक्ष और पार्षदों की लड़ाई से शहर में अव्यवस्था फैल रही है.. साफ-सफाई, वाटर सप्लाई या दूसरे विकास के काम ठप्प पडे हैं. अध्यक्ष संतूलाल सोनकर को सभी पार्षदों को साथ लेकर नगर विकास में काम करने की ज़रूरत है न कि थाना पुलिस के चक्कर काटने की. वही अधिकारी जनप्रतिनिधियों की लड़ाई से खुद को दूर करके बैठे है और विवाद शांत होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन ये विवाद अब लगातार बढ़ते ही जा रहा है.

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