नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास के साथ जारी रहेगा सुरक्षाबलों का ऑपरेशन प्रहार

पिछले 5 सालों में नक्सल प्रभावित जिलों की तादाद 126 से घटकर 82 पहुंच चुकी है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सुरक्षाबलों ने इन वर्षों में जो अभियान चलाए उनमें नक्सलियों को खासा नुकसान उठाना पड़ा

अमित पांडेय
Updated: July 3, 2019, 11:58 AM IST
नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास के साथ जारी रहेगा सुरक्षाबलों का ऑपरेशन प्रहार
development in Naxal affected areas
अमित पांडेय
अमित पांडेय
Updated: July 3, 2019, 11:58 AM IST
जिस तरीके से भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट लगातार जारी रहेगा और वहां कोई भी नरमी नहीं बरती जाएगी उसी तरीके से नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सुरक्षा बलों का जो ऑपरेशन है वो भी लगातार जारी रहेगा. नक्सल प्रभावित इलाकों में भारत सरकार की यह पहले से ही नीति रही है लेकिन 2 जुलाई को गृह सचिव की बैठक ने भारत सरकार की इस नीति को और धार दे दी है कि जितनी तेजी से ऑपरेशन चलेगा उतनी ही तेजी से उन इलाकों में विकास कार्य भी होंगे

सुरक्षाबलों की कार्रवाई से नक्सलियों को नुकसान

पिछले 5 सालों में नक्सल प्रभावित जिलों की तादाद 126 से घटकर 82 पहुंच चुकी है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने पिछले 5 सालों में जो ऑपरेशन चलाया था जिससे उनको बड़ा नुकसान झेलना पड़ा और उनका इलाका सिमटता गया. हालांकि भारत सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क बनाने का काम पहले से ही कर रही थी. लेकिन अब सड़क के साथ साथ मूलभूत सुविधाओं पर भी जोर दिया जाएगा. नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी ने जो फीडबैक गृह मंत्रालय को दिया है उसके मुताबिक सबसे ज्यादा जरूरत इन इलाकों में अच्छे मोबाइल नेटवर्क की है. इसके तहत इन राज्यों में न केवल मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ाई जाएगी बल्कि हाई क्वालिटी केबल भी दूरदराज के इलाकों में बिछाई जाएगी. छत्तीसगढ़,  तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा के अलावा मध्य प्रदेश,  झारखंड, बिहार में भी सरकार इसी नीति  के तहत काम करेगी

नक्सलियों ने बदली रणनीति  

पिछले 1 साल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों में काफी तेजी आई है तो नक्सलियों ने भी अपने संगठन में बदलाव किया है. नक्सलियों के नए सर्वोच्च नेता बसवराज की प्राथमिकता मिलिट्री वारफेयर है, यही वजह है कि चाहे वह छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव रहे हो या फिर नक्सल प्रभावित राज्यों में लोकसभा चुनाव, ज्यादातर नक्सली वारदातों में सुरक्षाबलों को ही निशाना बनाया गया. नक्सलियों की इसी बदलती रणनीति को ही देख कर नक्सल प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है जिसमें मोबाइल टावर लगवाना और केबल बिछाने का काम शामिल है

इसके अलावा इन इलाकों में तैनात सुरक्षाबलों को आधुनिक हथियार और काम करने का बेहतर माहौल मुहैया करवाने की पूरी कोशिश की जा रही है. इस कोशिश के कई सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं मसलन उन इलाकों में तिरंगा फहराना जहां अब तक कोई नहीं पहुंच पाया था. भारत सरकार की योजनाएं दूर दराज के नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंचाना ताकि जरूरतमंद लोगों को इसका फायदा मिल सके

यानी भारत सरकार ने विकास और नक्सल विरोधी अभियान दोनों बातों को एक साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में और तेजी से आगे ले जाने का फैसला लिया है, जिससे उन इलाके के लोगों के लगे कि विकास के लिए जो सरकार की योजनाए हैं उससे उनका ही फायदा होगा.
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First published: July 3, 2019, 11:18 AM IST
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