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रायगढ़: एसईसीएल कोल माइंस में किसका चल रहा है सिक्का

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 31, 2017, 3:37 PM IST
रायगढ़: एसईसीएल कोल माइंस में किसका चल रहा है सिक्का
बरौद कोयला खदान में अवैध वसूली

रायगढ़ में एसईसीएल खदानों में कोल माफ़िया का सिक्का चल रहा है. हैं तो ये सरकारी खदानें लेकिन माफ़िया की मर्ज़ी के बिना यहां पत्ता भी नहीं हिलता. माफिया के साथ स्टाफ भी मिला हुआ है.कैमरे में क़ैद, बरौद कोल माइंस की तस्वीरें देखकर आप खुद ही समझ जाएंगे.

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रायगढ़ में एसईसीएल खदानों में कोल माफ़िया का सिक्का चल रहा है. इन सरकारी खदानों में माफ़िया की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता. यहां रोज़ करोड़ों का काला कारोबार हो रहा है.

हर ट्रक से 20 रुपए

रायगढ़ में एसईसीएल की 4 कोयला खदान हैं. यहां कोयला खुदाई से लेकर माल ढुलाई तक हर काम और उसका रेट, माफिया तय करता है. बरौद कोल माइंस में माल की लोडिंग अनलोडिंग के लिए रोज़ 500 गाड़ियां गुज़रती हैं और हर गाड़ी से 20-20 रुपए वसूले जाते हैं. कोयला अगर अच्छी क्वालिटी का है और लोडिंग के लिए ट्रक पहले लगाना है तो फिर लेन-देन का खेल और बड़ा होता है.

कोयला खदान में काला कारोबार

जामपाली कोल माइंस दो साल पहले ही खुली है. सीबीआई ने यहां 50 करोड़ का घोटाला पकड़ा था. इस केस में तीन ट्रांसपोर्टर और एक खदान मैनेजर संदेह के दायरे में हैं. बारौद खदान में भी सीबीआई की टीम तीन बार छापा माकर करोड़ों की धांधली पकड़ चुकी है. छाल और धरम कोल माइंस में भी काला धंधा ज़ोरशोर से चल रहा है. इन खदानों में प्राइवेट लोड़र रात में कोयले की अवैध ढुलाई करते हैं. एसईसीएल के स्टाफ पर इस सारे काले कारोबार में आरोप लगता है कि वो कोल तस्करों को पाल रहा है.

सबके पास हैं बहानें

एसईसीएल की खदानें सरकारी होने के कारण खनिज विभाग भी सीधे दख़ल देने से बच रहा है और एसईसीएल के आला अधिकारी कैमरे के सामने कुछ बोलते नहीं. सबूत देने के बाद शिकायत का इंतजार है.

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First published: March 31, 2017, 3:37 PM IST
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